17 या 18 सितंबर… कब है विश्वकर्मा पूजा? बंगला और हिंदी पंचांग में अलग-अलग तारीख से भक्तों में भारी कन्फ्यूजन, पंडितों ने बताया सही दिन
आसनसोल | शिल्पांचल टुडे
सनातन धर्म के सबसे लोकप्रिय त्योहारों में से एक भगवान विश्वकर्मा पूजा को लेकर इस बार भक्तों में भारी भ्रम की स्थिति बन गई है। हर साल की तरह इस साल भी कारखानों, वर्कशॉप और मशीनों की पूजा की तैयारी जोरों पर है, लेकिन सवाल एक ही है –
विश्वकर्मा पूजा 17 सितंबर को है या 18 सितंबर को?
दरअसल, इस बार बंगला पंचांग (बंगाली पंजिका) और हिंदी पंचांग में तारीखों को लेकर अंतर देखने को मिल रहा है। बंगला पंचांग के अनुसार विश्वकर्मा पूजा 18 सितंबर, शुक्रवार को बताई जा रही है, जबकि हिंदी पंचांग और उत्तर भारतीय कैलेंडर में 17 सितंबर, गुरुवार को पूजा का शुभ मुहूर्त दिखाया जा रहा है।
क्यों हो रहा है कन्फ्यूजन?
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, ऐसा हर साल कन्या संक्रांति के समय होता है। भगवान विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति पर ही की जाती है। जब सूर्य सिंह राशि से कन्या राशि में प्रवेश करते हैं, उसी दिन यह पूजा होती है। इस बार संक्रांति का समय 17 और 18 के बीच पड़ रहा है, इसी कारण दो अलग-अलग तारीखें सामने आ रही हैं।
आसनसोल के पंडित क्या कह रहे हैं?
आसनसोल के वरिष्ठ पुरोहितों का कहना है कि उदया तिथि के अनुसार पूजा 17 सितंबर को ही मनाना अधिक शास्त्र सम्मत होगा, क्योंकि अधिकांश जगहों पर कारखानों में सुबह के समय पूजा होती है। वहीं बंगाल में पारंपरिक रूप से बंगला पंचांग को मानने वाले 18 सितंबर को भी पूजा करेंगे।
फिलहाल भक्त असमंजस में हैं, लेकिन अधिकतर कल-कारखानों और प्रतिष्ठानों में 17 सितंबर को ही विश्वकर्मा पूजा की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं।















