डॉटर्स डे पर फोटो डालना काफी नहीं, बेटी को हर दिन बराबरी और सुरक्षा देना ही असली सम्मान है
कुल्टी, शिल्पांचल टुडे
आज 27 सितंबर, डॉटर्स डे के मौके पर सोशल मीडिया बेटियों के साथ तस्वीरों और इमोशनल पोस्ट से भरा हुआ है। हर कोई लिख रहा है – “बेटी घर की शान है”। लेकिन क्या एक दिन की शुभकामना और एक तस्वीर ही काफी है? इस दिन का असली मतलब तभी पूरा होगा जब हम बेटी के भविष्य, उसकी शिक्षा, सुरक्षा और आत्मनिर्भरता पर गंभीरता से सोचें।
आंकड़े बेहतर हुए, पर चुनौती अभी बाकी है
सरकार बेटियों की शिक्षा के लिए लगातार कोशिश कर रही है। PIB की 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024-25 में माध्यमिक स्तर पर लड़कियों का Gross Enrolment Ratio बढ़कर 80.2% हो गया है और 97.5% स्कूलों में लड़कियों के लिए अलग शौचालय की सुविधा है। यह एक अच्छी प्रगति है।
लेकिन स्कूल में दाखिला ही आखिरी लक्ष्य नहीं है। असली चुनौती है – बेटी का स्कूल सुरक्षित माहौल में पूरा करना, कॉलेज तक पहुंचना, नौकरी पाना और बिना डर के सार्वजनिक जगहों पर आना-जाना।
कृति सैनन ने भी उठाया सुरक्षा का मुद्दा
इसी मुद्दे को हाल ही में अभिनेत्री कृति सैनन ने भी उठाया है। उन्होंने महिलाओं को रोजमर्रा में सुरक्षा को लेकर जिन चिंताओं का सामना करना पड़ता है, उस पर खुलकर बात की। यह दिखाता है कि पढ़ी-लिखी और सफल महिलाओं के लिए भी सुरक्षा आज भी एक बड़ा सवाल है।
इसलिए डॉटर्स डे का संदेश सिर्फ प्यार जताने तक सीमित नहीं होना चाहिए।
असली संदेश यही है – बेटी को सिर्फ एक दिन का प्यार नहीं, हर दिन बराबरी का अधिकार, सम्मान, सुरक्षा और अपने फैसले खुद लेने की आजादी चाहिए।














