नवरात्रि की षष्ठी पर करें माँ कात्यायनी की आराधना: शहद के भोग से दूर होंगी शादी की बाधाएं, जानें पूजा की पूरी विधि
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व पर षष्ठी तिथि का विशेष महत्व होता है। इस दिन आदिशक्ति माँ दुर्गा के छठे स्वरूप माँ कात्यायनी की पूजा की जाती है। ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत मिश्रा (MAJY) ने बताया कि इस दिन विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों के सभी कष्ट दूर होते हैं।
क्यों कहलाती हैं कात्यायनी?
पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि कात्यायन ने माँ आदिशक्ति को पुत्री के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ ने उनके घर में पुत्री के रूप में जन्म लिया, इसलिए इनका नाम कात्यायनी पड़ा। इन्हें ब्रजमंडल की अधिष्ठात्री देवी भी कहा जाता है।
माँ का स्वरूप और महिमा
माँ कात्यायनी सिंह पर सवार हैं और इनकी चार भुजाएँ हैं। एक हाथ अभय मुद्रा में, दूसरे में वर मुद्रा, तीसरे में तलवार और चौथे हाथ में कमल का फूल सुशोभित है।
मान्यता है कि माँ कात्यायनी की पूजा से सारे पाप नष्ट होते हैं, शत्रुओं का नाश होता है और सबसे बड़ा लाभ यह है कि *विवाह में आ रही सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।*
षष्ठी पर ऐसे करें पूजा
1. स्नान और शुद्धि: सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लाल या पीले वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल पर गंगाजल छिड़कें।
2. संकल्प लें: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर पूजा का संकल्प लें। माँ को लाल फूल, खासकर गुड़हल या गुलाब अति प्रिय है।
3. भोग का विशेष ध्यान: माँ कात्यायनी को शहद का भोग सबसे प्रिय है। पूजा में शहद या शहद से बनी मिठाई जरूर चढ़ाएं। इसके साथ श्रृंगार का सामान जैसे चूड़ी, सिंदूर और महावर भी अर्पित करें।
4. मंत्र का जाप करें:
या देवी सर्वभूतेषु माँ कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
पूजा के अंत में धूप-दीप से आरती करें और भूल-चूक के लिए क्षमा मांगते हुए परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
– पंडित हेमंत मिश्रा, ज्योतिषाचार्य (MAJY)
संपर्क: 9332449502
जय बजरंगबली
















