आसनसोल अदालत में पहली बार सुनाई गई फांसी की सजा, कलयुगी पिता ने नाबालिक बेटी से दुष्कर्म कर की हत्या
आसनसोल । 12 मई 2024 को बर्नपुर के हीरापुर थाना अंतर्गत नरसिंह बांध इलाके में कचु बागान क्षेत्र में एक पिता पर आरोप लगा था कि उन्होंने अपनी नाबालिग बेटी से दुष्कर्म कर गला घोंट कर उसकी हत्या कर दी थी। इस घटना में आसनसोल अदालत द्वारा आरोपी पिता को दो दिन पहले दोषी करार दिया गया था। आसनसोल अदालत के जज ने पिता को फांसी की सजा सुनाए। इस बारे में सरकारी पक्ष के वकील ने बताया कि 2024 की 12 मई को रात में इस व्यक्ति ने अपनी बेटी से दुष्कर्म किया और उसकी हत्या कर दी। सुबह जब लड़की की मां ने देखा कि उनकी बेटी के सर से लेकर पैर तक चादर तनी हुई है तब उन्हें कुछ संदेह हुआ उन्होंने जब चादर हटाया तो देखा कि उनकी बेटी के नाक और कान से खून आ रहा है। उन्होंने चीखना चिल्लाना शुरू किया और उन्होंने अपने पड़ोसियों को भी इस बात की जानकारी दी। लेकिन हैरानी की बात यह थी की लड़की के पिता के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी। वह अपनी पत्नी को हॉस्पिटल या पुलिस के पास जाने से रोक रहे थे और कह रहे थे कि इससे परिवार की बदनामी होगी। लेकिन आरोपी की पत्नी उनकी बात नहीं मानी और वह अपनी बेटी को अस्पताल लाई जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सरकारी पक्ष के वकील ने बताया की आरोपी पिता खुद टोटो चलाते हैं लेकिन वह अपने टोटो पर अपनी बेटी को हॉस्पिटल नहीं लेकर गए इसके बाद पीड़िता का पोस्टमार्टम किया गया, जिसमें यह खुलासा हुआ कि गला घोंटकर उसकी हत्या की गई है और हत्या से पहले उसके साथ दुष्कर्म भी किया गया है। सरकारी पक्ष के वकील ने बताया कि इस मामले में जो इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर थे। उनको कुछ बेहद सटीक प्रमाण मिले थे। 14 तारीख को पीड़िता की मां ने अपने पति के खिलाफ ही थाना में शिकायत दर्ज की। पीड़िता के पिता को हिरासत में लिया गया और जांच के दौरान इस व्यक्ति ने मजिस्ट्रेट के सामने अपने अपराध को कबूल भी किया था। दो दिन पहले जज ने इस मामले में उसे दोषी करार दिया। इससे पहले अदालत द्वारा 16 लोगों के गवाही ली गई जिसमें एफएसएल एक्सपर्ट पीड़िता की मां पीड़िता के अन्य रिश्तेदार शामिल थे। इन सब की गवाही सुनने के बाद और इन्वेस्टिगेटिंग ऑफीसर द्वारा अदालत में पेश किए गए सबूतों के आधार पर उसे दोषी करार दिया गया और आज उसे फांसी की सजा सुनाई। सरकारी पक्ष के वकील ने कहा कि संभवत आसनसोल अदालत के इतिहास में पहली बार किसी मुजरिम को फांसी की सजा दी गई।


















