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इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग सबसे अधिक

आसनसोल । गणेश चतुर्थी नजदीक आते ही बाजारों में गणेश जी की मूर्तियाें की मांग बढ़ जाती है। इस बार भी पारंपरिक मिट्टी की मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा है। श्रद्धालु पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए मिट्टी और प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियों को प्राथमिकता दे रहे हैं। इस साल खासतौर पर इको-फ्रेंडली गणेश मूर्तियों की मांग सबसे ज्यादा बढ़ी है।
ईको-फ्रेंडली मूर्ति वह होती है जो प्राकृतिक और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाने वाली सामग्रियों जैसे मिट्टी, गाय के गोबर या पेपर माचे से बनी होती है और जिनमें रासायनिक रंगों का उपयोग नहीं किया जाता है। इन मूर्तियों का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण प्रदूषण को कम करना है, क्योंकि ये पानी में आसानी से घुल जाती हैं या प्राकृतिक रूप से विघटित हो जाती हैं, जिससे पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं होता है।

ईको-फ्रेंडली मूर्तियों की विशेषताएँ

सामग्री: ये मिट्टी, गाय के गोबर, भूसे, कागज के गूदे और प्राकृतिक गोंद से बनाई जाती हैं.

रंग: इनमें रासायनिक रंगों की बजाय प्राकृतिक रंग जैसे हल्दी, कुमकुम, या फूल-पत्तियों से बने रंग का इस्तेमाल होता है.

जैव-निम्नीकरणीय : ये सामग्रियां पानी में घुल जाती हैं और प्राकृतिक रूप से टूट जाती हैं, जिससे जलीय जीवन या मिट्टी को कोई नुकसान नहीं होता है।

प्रदूषण में कमी: ये प्लास्टर ऑफ पेरिस  और हानिकारक रसायनों से बनी मूर्तियों से होने वाले पर्यावरण प्रदूषण को कम करती हैं।

ईको-फ्रेंडली मूर्तियों का महत्व

पर्यावरण संरक्षण : इनका मुख्य उद्देश्य पर्यावरण को बचाना और प्लास्टिक व अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल सामग्रियों के उपयोग को कम करना है।

जलीय जीवन की सुरक्षा : पारंपरिक मूर्तियों के विसर्जन से होने वाले प्रदूषण से जलीय जीवों और पारिस्थितिक तंत्र को बचाना।

प्रकृति के प्रति जागरूकता : यह उत्सवों को और अधिक सार्थक बनाता है और लोगों को पर्यावरण की रक्षा के महत्व की याद दिलाता है।

 

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