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सेल आईएसपी प्रबंधन द्वारा लीज, किराया में बेतहाशा वृद्ध किए जाने के विरुद्ध मुखर हुए तृणमूल पार्षद

बर्नपुर (भरत पासवान ) । सेल आईएसपी प्रबंधन द्वारा जमीन को लीज, किराया दिए जाने में बेतहाशा वृद्धि किए जाने पर वार्ड नंबर 78 के पार्षद अशोक रुद्र ने कड़ी आलोचना की है। मंगलवार को स्टेशन रोड स्थित तृणमूल कार्यालय में प्रेसवार्ता कर उन्होंने आईएसपी के इस किराया, लीज की नीति को लेकर कई आरोप लगाते हुए मामले को बेवजह लटकाए रखने का आरोप लगाया। लोग बार- बार उनके पास आकर इस मुद्दे को हल करने का आग्रह कर रहे हैं। पार्षद अशोक रुद्र ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि बर्नपुर टाउनशिप स्थित बर्नपुर मुख्य डाकघर, बाजार डाकघर, एसबीआई बर्नपुर ब्रांच, पेट्रोल पंप सहित कई व्यावसायिक प्रतिष्ठान आईएसपी की जमीन पर है। जिसे आईएसपी प्रबंधन ने लीज अथवा किराए पर दे रखा है लेकिन आईएसपी प्रबंधन के गलत नीतियों के कारण लोगों के बीच अफवाह फैल गई है कि बर्नपुर डाकघर एवं एसबीआई अन्य स्थान पर शिफ्ट हो जाएगा। इसकी जानकारी लेने के लिए वे डाकघर के पोस्टमास्टर एवं एसबीआई के चीफ मैनेजर से मुलाकात की। पार्षद अशोक रुद्र ने बताया कि आईएसपी प्रबंधन ने लीज, किराए में बेतहाशा वृद्धि की है, पूर्व में बर्नपुर डाकघर की जमीन को 33 साल के लिए लीज पर मात्र 1 रुपए में दिया गया था। जिसे अब 33 साल के लीज के लिए बढ़ाकर 1 करोड़ साढ़े दस लाख रुपए कर दिया गया है। इसी तरह एसबीआई बर्नपुर ब्रांच की जमीन के किराए में बेतहाशा वृद्धि करते हुए हर माह 18 हजार रुपए को बढ़ाकर 4 लाख रुपए कर दिया गया है जबकि एसबीआई ने बैंक से सटे काफी जमीन, क्वार्टर को खाली कर दिया है। वहीं बर्नपुर पेट्रोल पंप की जमीन के लिए आईएसपी पहले साढ़े आठ हजार रुपए हर माह किराया लेती थी, अब इसे बढ़ाकर लगभग लाख रुपए कर दिया गया है। आईएसपी की इस गलत नीति को लेकर बर्नपुर डाकघर प्रबंधन ने आईएसपी प्रबंधन को रिवीजन करने के लिए पत्र भेजा है। यही नहीं इस गलत नीति के कारण कई छोटे दुकानदारों ने अपना कारोबार तक बंद कर दिया है। उन्होंने कहा कि पोस्ट ऑफिस, आईएसपी दोनों ही केंद्र सरकार के अधीन है किन्तु आईएसपी की गलत नीतियों के कारण दोनों में बेवजह टकराव की स्थिति बन गई है। इस मुद्दे को लेकर वे शीघ्र आईएसपी प्रबंधन के वरीय अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आमजन के साथ बर्नपुर स्टेशन से बंद ट्रेनों का परिचालन दोबारा शुरू करने के मुद्दे पर सफलता मिली है लेकिन अभी भी दो ट्रेनों को परिचालन शुरू नहीं हुआ है। साथ ही टोटो ड्राइवरों के साथ उनके विरुद्ध भी रेलवे ने आंदोलन करने पर मामला दर्ज कर रखा है। केंद्र सरकार के प्रतिष्ठान लोगों का ध्यान रखने के बजाय अपनी गलत नीतियों के कारण जानबूझकर इस राज्य के लोगों को परेशान करने में जुटी है।

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