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नेपाल में जो कुछ भी हुआ उसकी पुनरावृत्ति कहीं नहीं होनी चाहिए। : शंकराचार्य

आसनसोल । पंचगछिया स्थित आनंदम रेजीडेंसी में  पूरी के मत आदेश महाराज निश्चलानंद  सरस्वती जी ने  प्रेस मीट की। उन्होंने बेबाक अंदाज में धर्म से लेकर राजनीति और विदेश नीति हर विषय पर अपनी राय जाहिर की। नेपाल में जो संकट आया है, उसे लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा की नेपाल में जो भी स्थिति है। वह दुर्भाग्यपूर्ण है, उसका शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए समाधान निकालना चाहिए। इस तरह से विद्रोह करके किसी भी समस्या का समाधान नहीं निकल सकता। यह इसका समाधान नहीं है उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसा सोच रहे हैं कि नेपाल जैसी स्थिति भारत वर्ष में भी आ सकती है। वह सही नहीं है। उन्होंने कहां के नेपाल में जो कुछ भी हुआ उसकी पुनरावृत्ति कहीं नहीं होनी चाहिए। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी बेबाक राय व्यक्त करते हुए कहां की आज की तारीख में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे विश्व में प्रख्यात हैं। लेकिन अगर वह परंपरा से प्रतिष्ठित धर्माचार्यों को अपना अंग बनाने का प्रयास छोड़ दें तो वह और ज्यादा प्रभावशाली भूमिका में आ सकते हैं।  वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उम्र को लेकर पूछे गए एक सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा कि अगर उन्होंने पहले यह कहा है कि एक निश्चित उम्र के बाद राजनीति में नहीं आना चाहिए तो उन्हें अपने ऊपर भी इसका प्रयोग करना चाहिए। वहीं पश्चिम बंगाल के लोगों का बंगाल के बाहरी प्रदेशों में अपमानित होने के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा कि अगर बाहरी प्रदेशों के लोग पश्चिम बंगाल में अपमानित नहीं होते हैं। उन पर अत्याचार नहीं होता तो यहां के लोग भी बाहर के प्रदेशों में उसे स्थिति का सामना नहीं करेंगे। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अयोध्या में राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा किए जाने के सवाल पर शंकराचार्य जी ने कहा कि यह बहुत प्रसन्नता का विषय है कि 500 वर्षों की समस्या का समाधान हुआ। लेकिन जिस पद्धति से हुआ। उसके बारे में भी सोचने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा किसी अधिकृत व्यक्ति के द्वारा ही यह कार्य किया जाना चाहिए था। इस पर विचार करना पड़ेगा कि क्या प्रधानमंत्री इस कार्य को करने के लिए अधिकृत थे या नहीं इसके साथ ही उन्होंने मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा के लिए मुहूर्त का ध्यान रखने की भी बात कही शंकराचार्य जी ने साफ कहा कि राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा करने के पीछे उनकी यह मंशा थी कि भाजपा चुनाव में इसका फायदा उठा सके। शंकराचार्य जी ने भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय नरसिंह राव को लेकर कहा कि वह चाहते थे कि अयोध्या में निश्चित स्थान पर राम मंदिर का निर्माण तो हो लेकिन आसपास मस्जिदों का भी निर्माण हो जब उन्होंने इस पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया तो प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने उनके अपहरण और उनकी हत्या का प्रयास किया। वही एक और पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई के बारे में बोलते हुए शंकराचार्य जी ने कहा कि जब अटल बिहारी वाजपेई प्रधानमंत्री हुए तो उन्होंने इस पूरे विषय पर ज्यादा इच्छा नहीं प्रकट की इतना ही नहीं उन्होंने एक आतंकवादी को पूरी के शंकराचार्य के रूप में प्रतिष्ठित किया और उसका प्रचार भी किया इतना ही नहीं उन्होंने वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर कहां की वह उसे आतंकवादी को प्रश्रय दे रहे हैं हालांकि जब उनसे यह पूछा गया कि उसे व्यक्ति का नाम क्या है तो उन्होंने कहा कि वह उस व्यक्ति का नाम लेना नहीं चाहते। वही गौ हत्या के मुद्दे पर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री हुआ करते थे तब उन्होंने तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के बारे में कहा था कि उन्हें गौ हत्या पर रोक लगा चाहिए लेकिन आज उनको प्रधानमंत्री बने 11 साल हो गए हैं अगर वह इसे लेकर गंभीर हैं तो उन्होंने अब तक गौ हत्या पर रोक क्यों नहीं लगवाई वही धर्म और राजनीति को अलग रखने के संबंध में कुछ राजनीतिज्ञों के विचार पर पूछे गए सवाल के जवाब में शंकराचार्य जी ने कहा धर्म को कभी राजनीति से अलग नहीं किया जा सकता क्योंकि राजनीति को राजधर्म कहा जाता है इसलिए जो लोग यह कहते हैं कि धर्म को राजनीति से अलग करना चाहिए वह क्या चाहते हैं की राजनीति को धर्म से जोड़ा जाए उन्होंने साफ कहा कि राजनीति राज धर्म है और इन्हें कभी अलग नहीं किया जा सकता।

 

 

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