कोलकाता हाईकोर्ट ने तीन माह के भीतर आईएसपी में मान्यता प्राप्त यूनियन का चुनाव करने का दिया आदेश
बीएमएस को छोड़कर चार यूनियनों ने प्रेसवार्ता कर दी जानकारी
इलेक्शन नहीं कराने के लिए नहीं बल्कि कम समय में इलेक्शन कराने के नोटिस का कर रहे थे विरोध
बीएमएस पर लगाया श्रमिकों को भ्रमित कर बांटने का आरोप
बर्नपुर(भरत पासवान)। सेल आईएसपी के सक्रिय पांचों यूनियन में से बीएमएस को छोड़कर चार ट्रेड यूनियन द्वारा गुरुवार को संयुक्त रूप बारी मंजिल स्थित इंटक कार्यालय में प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। प्रेसवार्ता में आईएसपी में मान्यता प्राप्त यूनियन चुनाव को लेकर हाईकोर्ट में चल रहे मामले में आए निर्णय की जानकारी दी गई। पत्रकारों को संबोधित करते हुए इंटक नेता हरजीत सिंह ने बताया कि आईएसपी में वन इंडस्ट्री वन यूनियन को लेकर हाईकोर्ट में केस चल रहा था। सेल आईएसपी के चारों यूनियन हमेशा चुनाव कराने के पक्ष में थी लेकिन बीच में बीएमसी और मैनेजमेंट के मुताबिक नोमिनेशन रिटर्न व विड्रो भी किया। उसके बाद बीएमएस हाई कोर्ट चला गया। इस मामले की सुनवाई 25 फरवरी ,2025 को शुरू हुई थी। 22 अप्रैल ,2025 को मामले को चैलेंज करने के बाद 28 अप्रैल को फाइनल हुआ की इलेक्शन होना चाहिए।
सभी की सहमति थी कि इलेक्शन होना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि यहां के आरएलसी ने 22 अप्रैल को ऑर्डर आने के बावजूद किसी को बिना बताए ढाई महीने बाद सभी श्रमिक संगठनों को 15 दिन पहले बताया कि इलेक्शन होगा। जबकि 20 अप्रैल को स्ट्राइक का नोटिस दिया हुआ था, इस पर सहमति नहीं जताने के बावजूद आरएलसी ने कहा कि वे तीन माह किसी कार्य में व्यस्त हो जाएंगे इसलिए इलेक्शन होगा। साथ ही उन्होंने इलेक्शन की प्रक्रिया शुरू कर दी। श्रमिक संगठनों ने इस पर नाराजगी जताते हुए रजिस्ट्रार के पास जाकर कहा कि पंद्रह दिन में कैसे इलेक्शन होगा। रजिस्ट्रार ने भी इस पर सहमति नहीं जताई। आखिरकार कोर्ट में यह मामला चला, 24 सितंबर ,2025 बुधवार को हाईकोर्ट ने ऑर्डर दिया कि तीन माह में इलेक्शन कराना है। यह सभी श्रमिक संगठनों के लिए खुशी की बात है। 15 दिनों में इलेक्शन नहीं कराने को लेकर जारी लड़ाई में काफी समय बर्बाद हो गई, अप्रैल से सितंबर तक का समय बर्बाद हो गया। आखिरकार कोर्ट के द्वारा मान्यता प्राप्त हुआ कि राज्य सरकार ही यह इलेक्शन कराएगा। यह चुनाव राज्य सरकार तीन माह के भीतर कराएगी। वहीं सीटू नेता सोरेन चटर्जी ने इस मामले में कहा कि बीते 22 अप्रैल को लेबर कमिश्नर ने श्रमिक संगठनों को ई मेल कर बताया कि मान्यता प्राप्त यूनियन का चुनाव के मुद्दे को लेकर 28 अप्रैल को बैठक होगी।
सीटू ने कभी भी चुनाव का विरोध नहीं किया। केवल यह अपील किया गया कि इलेक्शन की प्रक्रिया के बीच स्ट्राइक था। बैठक में बताया गया कि कम समय में इलेक्शन कैसे हो सकता है। 20 मई को स्ट्राइक के बाद इलेक्शन कराने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की गई थी। जिस पर कहा गया कि कोर्ट में जाकर रिव्यू की अपील कर इलेक्शन की तारीख मांगी जाएगी। इसके पूर्व बीएमएस ने कोर्ट ने जाकर फरवरी माह में ही एकतरफा जाकर बिना किसी को पार्टी बनाए एवं जानकारी दिए इलेक्शन कराने का ऑर्डर ले आई। वहीं इस मामले में आरएलसी द्वारा कम समय में इलेक्शन कराने के नोटिस को कोर्ट में चैलेंज किया गया था न कि इलेक्शन नहीं कराने की मांग की गई थी।
जो हमारे कोलकाता हाईकोर्ट के रिट याचिका में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है। 29 अप्रैल से लगातार इस मामले को सुनवाई चलती रही अंत में हाईकोर्ट ने अपनी राय, फैसला दिया कि यहां मान्यता प्राप्त यूनियन का चुनाव जिस तरह कराया जा रहा था, वह सही नहीं है। फैसला दिया गया है कि तीन महीने के भीतर चुनाव होगा। एक यूनियन एकतरफा चुनाव कराने का ऑर्डर ले आई थी। सभी यूनियन लोकतांत्रिक तरीके से सभी को साथ लेकर चलती है जबकि एक यूनियन अकेले चलकर श्रमिक को बांटने का प्रयास किया। बर्नपुर के सभी श्रमिक संगठनों ने एकजुट होकर इस्को को बचाने के लिए सालों तक लड़ाई की। दूसरी तरफ एक श्रमिक संगठन अकेले चलकर श्रमिकों को बांटने का प्रयास किया लेकिन इसका लाभ नहीं मिलेगा। वहीं एटक के आरएन सिंह ने भी अपना विचार रखते हुए यही जानकारी साझा कर एकजुट होकर श्रमिक हित की रक्षा करने पर जोर दिया। एचएमएस नेता मुमताज अहमद ने भी इस पर अपना विचार रखा और बीएमएस पर तीखा प्रहार किया। हमारे संवाददाता भारत पासवान सहित अन्य पत्रकारों ने आईएसपी के श्रमिकों के वेतन वृद्धि सहित विभिन्न मुद्दों पर सवाल भी पूछा। वहीं इस प्रेसवार्ता में चारों यूनियन नेताओं में इंटक के हरजीत सिंह, सीटू के सोरेन चटर्जी, एटक के आरएन सिंह, एचएमएस के मुमताज अहमद, इंटक नेता विजय सिंह, विप्लव माजी मौजूद थे।
































