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‘दुर्गापुर की इस्पात फैक्ट्री में ब्लास्ट, 4 श्रमिक झुलसे: 2 की हालत नाजुक, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल’

दुर्गापुर। दुर्गापुर के गोपालपुर स्थित एक निजी इस्पात कारखाने में शुक्रवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। भट्टी में जोरदार ब्लास्ट होने से 4 श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए। इनमें परिमल विश्वास और निरंजन बागदी की हालत नाजुक बताई जा रही है। सभी घायलों को राजबांध के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

सुबह-सुबह हुआ धमाका, मचा हाहाकार:
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक शुक्रवार सुबह रोज की तरह कारखाने में काम चल रहा था। तभी अचानक भट्टी से तेज धमाके के साथ ब्लास्ट हो गया। आग की लपटें और पिघला हुआ पदार्थ छिटकने से वहां काम कर रहे 4 श्रमिक बुरी तरह झुलस गए। धमाके की आवाज सुनकर पूरे कारखाने में अफरा-तफरी मच गई। सहकर्मियों ने तुरंत घायलों को अस्पताल पहुंचाया।

2 श्रमिकों की हालत गंभीर:
घायलों में परिमल विश्वास और निरंजन बागदी की हालत चिंताजनक है। डॉक्टरों के अनुसार उनके शरीर का बड़ा हिस्सा झुलस गया है। बाकी 2 श्रमिकों का भी इलाज चल रहा है। अस्पताल के बाहर घायलों के परिजनों और साथी मजदूरों की भीड़ जुट गई।

श्रमिकों का फूटा गुस्सा, लगाए गंभीर आरोप:
हादसे के बाद श्रमिकों ने कारखाना प्रबंधन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए:
1. सुरक्षा इंतजाम नहीं: लंबे समय से बिना पर्याप्त सुरक्षा उपायों के काम कराया जा रहा है।
2. सुरक्षा उपकरण नदारद: नियमों के मुताबिक हेलमेट, ग्लव्स, फायर-सूट जैसे जरूरी उपकरण नहीं दिए जाते।
3. ईएसआई-पीएफ से वंचित: ज्यादातर श्रमिकों को ईएसआई और पीएफ जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं।

मुआवजे और इलाज की मांग पर प्रदर्शन:
हादसे के बाद श्रमिकों ने कारखाने के गेट पर प्रदर्शन किया। उनकी मांग है कि घायलों का बेहतर इलाज कराया जाए और पीड़ित परिवारों को तुरंत मुआवजा दिया जाए।

बीजेपी ने भी उठाए सवाल:
घटना पर बीजेपी नेता शुभाशीष मुखोपाध्याय ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “बार-बार ऐसे हादसे हो रहे हैं, लेकिन कारखानों में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं है। घायलों को सही इलाज तक नहीं मिलता। अगर श्रमिकों को कुछ होता है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी कारखाना प्रबंधन की होगी।”

फिर कठघरे में सुरक्षा व्यवस्था:
इस हादसे ने एक बार फिर निजी कारखानों में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन ने जांच की बात कही है, लेकिन श्रमिक संगठनों का कहना है कि सिर्फ जांच से कुछ नहीं होगा, सख्त कार्रवाई जरूरी है।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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