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“जंतर-मंतर पर हुए ‘अलोकतांत्रिक दुर्व्यवहार’ से आहत निंगेश्वर मंदिर के पुजारी ने PM मोदी को लिखा पत्र, धरना स्थल बदलने और अंतरजातीय विवाह को बढ़ावा देने की मांग”

जामुड़िया/आसनसोल । दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन में सुरक्षाकर्मियों, प्रधानमंत्री और संसद के प्रति हुए कथित दुर्व्यवहार से आहत होकर निंगा के प्रसिद्ध निंगेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी और साहित्यकार पंडित आर्य प्रहलाद गिरि ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 3 पन्नों का पत्र लिखा है।

पत्र में पंडित गिरि ने PM मोदी को “राजर्षि” संबोधित करते हुए कहा कि भविष्य में संसद की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जंतर-मंतर को धरना-प्रदर्शन स्थल के रूप में बदला जाए। इसकी जगह बाहरी दिल्ली में कहीं सीमित समय के लिए ही प्रदर्शन की अनुमति दी जानी चाहिए।

क्या-क्या मांगें रखीं
पंडित आर्य गिरि ने पत्र में दो मुख्य मांगें रखीं:

1. कड़ी कार्रवाई: सड़कों पर भीड़ जुटाकर तख्तापलट की कोशिश करने वालों और उन्हें उकसाने वालों की नागरिकता रद्द की जाए, चाहे वो जनप्रतिनिधि ही क्यों न हों। उन्होंने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को “विदेश संचालित काक्रोचों का असभ्य और आक्रामक हुड़दंग” बताया।

2. हिंदू एकता के लिए उपाय: उन्होंने कहा कि विदेशी ताकतें जातिवाद, क्षेत्रवाद और भाषावाद के नाम पर हिंदुओं को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। इसे रोकने के लिए अंतरजातीय विवाहों को सरकार द्वारा भरपूर प्रोत्साहन दिया जाए। उनके अनुसार यही हिंदू एकता को मजबूत करने का “एकमात्र अमोघ उपाय” है।

“2 दिन तक नहीं किया खाना”
पंडित गिरि ने बताया कि जंतर-मंतर की घटनाओं से वे इतने व्याकुल हो गए थे कि 2 दिन तक खाना नहीं खा सके। इससे उनका ब्लड प्रेशर गिरकर 95/60 हो गया था। इसी कारण वे पत्र पहले नहीं भेज पाए।

उन्होंने कहा कि देश की एकता और संसद की गरिमा बनाए रखने के लिए ऐसे अलोकतांत्रिक कृत्यों पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।

 

 

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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