“अन्नपूर्णा योजना पर सियासत तेज: 1.45 करोड़ महिलाओं को ₹3000 भेजने का दावा, फिर क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन? – पूरी रिपोर्ट”
कोलकाता / आसनसोल । पश्चिम बंगाल सरकार की महत्वाकांक्षी अन्नपूर्णा योजना इन दिनों चर्चा के केंद्र में है। सरकार का दावा है कि तीसरी किस्त के तहत 1 करोड़ 45 लाख चयनित महिलाओं के खाते में ₹3,000 भेजे जा चुके हैं। दूसरी तरफ राज्य के कई जिलों में महिलाओं द्वारा सड़क जाम, रेल रोको और BDO ऑफिस घेराव की तस्वीरें भी सामने आ रही हैं। सवाल उठ रहा है कि जब पैसा भेजा गया है तो विरोध क्यों?
इस रिपोर्ट में हम आंकड़ों और जमीनी हकीकत को समझते हैं।
1. योजना क्या है और आंकड़ा क्या कहता है?
सरकारी जानकारी के अनुसार अन्नपूर्णा योजना के तहत 25 से 60 वर्ष की महिला निवासी, जो स्थायी सरकारी नौकरी में नहीं है और आयकरदाता नहीं है, को हर महीने ₹3,000 की सहायता दी जाती है।
इस बार कुल आंकड़ा इस तरह है:
– कुल आवेदन प्राप्त: करीब 1.80 करोड़
– सत्यापित आवेदन: करीब 1.62 करोड़
– चयनित लाभार्थी (जिन्हें भुगतान किया गया): 1.45 करोड़
– होल्ड / रोके गए आवेदन: करीब 17 लाख
इन 17 लाख में से लगभग 10 लाख मामलों में आधार-बैंक लिंक की तकनीकी समस्या बताई गई है।
यानी 1.80 करोड़ आवेदन में से 1.45 करोड़ को भुगतान, बाकी सत्यापन और पात्रता की प्रक्रिया में हैं।
2. ₹4,350 करोड़ का DBT ट्रांसफर
सरकार के अनुसार 17 अगस्त से DBT के जरिए तीसरी किस्त का भुगतान शुरू हुआ था। 1.45 करोड़ x ₹3000 के हिसाब से एक किस्त में करीब ₹4,350 करोड़ का भुगतान बनता है। सरकार ने इसे 20 अगस्त तक पूरा करने का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में बढ़ाया गया।
3. फिर सड़क पर महिलाएं क्यों?
जमीनी रिपोर्ट के अनुसार प्रदर्शन की तीन मुख्य वजहें सामने आ रही हैं:
पहली वजह – तकनीकी कारण से पैसा अटका: कई महिलाओं का कहना है कि आवेदन और सत्यापन के बाद भी पैसा खाते में नहीं आया।
दूसरी वजह – आवेदन होल्ड / रिजेक्ट: आधार-बैंक लिंक, दस्तावेज या पात्रता के कारण करीब 17 लाख आवेदन रोके गए हैं, जिससे नाराजगी है।
तीसरी वजह – भ्रम और जानकारी का अभाव: कई जगह ऐसी भीड़ भी देखी गई जिनकी मांग सीधे तौर पर भुगतान से जुड़ी नहीं थी, जिससे मामला और उलझा।
कोचबिहार, दक्षिण दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद, पूर्व बर्धमान, बीरभूम और उत्तर 24 परगना में ऐसे प्रदर्शनों की खबरें आई हैं।
4. बराकर की घटना से उठे सवाल
इसी बीच आसनसोल के बराकर से एक अलग मामला सामने आया। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन में शामिल एक व्यक्ति की पत्नी के खाते में अन्नपूर्णा की राशि पहले ही पहुंच चुकी थी, फिर भी वह प्रदर्शन में शामिल था। बाद में प्रशासनिक पूछताछ के बाद उसने माफी मांगी।
यह एक अकेली घटना पूरे आंदोलन को परिभाषित नहीं करती, लेकिन इससे यह सवाल जरूर उठता है कि क्या हर जगह प्रदर्शन में सिर्फ वास्तविक वंचित महिलाएं हैं या कहीं-कहीं राजनीतिक कार्यकर्ता भी भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं? इसका जवाब जिला-वार जांच से ही मिलेगा।
5. सरकार और विपक्ष का पक्ष
सरकार का पक्ष: मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने 22 अगस्त को कहा कि कोई भी पात्र महिला योजना से बाहर नहीं रहेगी। जरूरत पड़ने पर लाभार्थियों की संख्या 20-30 लाख तक बढ़ाई जा सकती है और होल्ड मामलों को दोबारा सत्यापन का मौका मिलेगा। सरकार का कहना है कि पात्रता का फैसला प्रदर्शन या सोशल मीडिया से नहीं, दस्तावेजों से होगा।
विपक्ष (TMC) का पक्ष: विपक्ष का आरोप है कि बड़े पैमाने पर आवेदन के बाद क्रियान्वयन में देरी हुई, जिससे महिलाओं को परेशानी हुई। कई जगह महिलाओं ने लक्ष्मी भंडार योजना को जारी रखने की मांग की है।
सत्तारूढ़ BJP का पक्ष: मंत्री अग्निमित्रा पाल सहित BJP नेताओं का आरोप है कि कुछ जगहों पर विपक्ष योजना को लेकर लोगों को उकसा रहा है। हालांकि यह अभी आरोप है, तथ्य नहीं।
निष्कर्ष: सच क्या है?
इस पूरे विवाद में दोनों बातें सच हैं:
1. सरकार ने 1.45 करोड़ लाभार्थियों को भुगतान किया है, यह एक बड़ा आंकड़ा है।
2. वहीं 1.80 करोड़ में से करीब 35 लाख आवेदक ऐसे हैं जो पहली सूची में नहीं हैं, उनमें कई वास्तविक शिकायतकर्ता भी हैं।
इसलिए न तो हर प्रदर्शन को “राजनीतिक साजिश” कहना सही है और न ही हर प्रदर्शन को “सरकार की विफलता” कहना।
असली समाधान तभी निकलेगा जब सरकार जिला-वार डेटा जारी करे कि कितने आवेदन रिजेक्ट हुए, कितनों का पैसा तकनीकी कारण से फंसा और दोबारा आवेदन की प्रक्रिया कितनी सरल है। फिलहाल पात्र महिलाओं को आधिकारिक अन्नपूर्णा पोर्टल पर अपनी आवेदन स्थिति जांचने और दोबारा सुधार का मौका दिया गया है।














