आसनसोल-दक्षिण में फिर गरमाया कोयले का मुद्दा, रोजगार घटा, अवैध खनन और भू-धंसान से बढ़ी लोगों की चिंता
आसनसोल । आसनसोल-दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में एक बार फिर कोयला अर्थव्यवस्था चर्चा के केंद्र में है। रानीगंज कोलफील्ड का हिस्सा रहा यह क्षेत्र दशकों से कोयला उद्योग पर निर्भर है, लेकिन अब यहां रोजगार का संकट, अवैध खनन और जमीन धंसने की घटनाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
रोजगार के अवसर हुए कम
स्थानीय लोगों का कहना है कि तकनीक बदलने और खदानों के पुनर्गठन के बाद से कोयला खदानों में स्थायी नौकरियां घट गई हैं। पहले जहां एक परिवार से कई लोग ECL में काम करते थे, अब युवाओं को अनौपचारिक काम या दूसरे राज्यों में जाना पड़ रहा है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ रहा है।
अवैध खनन पर ED की कार्रवाई
अवैध कोयला खनन का मुद्दा भी लगातार सुर्खियों में है। अप्रैल 2026 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दुर्गापुर-आसनसोल बेल्ट में अवैध खनन, कोयला चोरी और परिवहन से जुड़े एक बड़े मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। जांच एजेंसी ने करोड़ों रुपये की अवैध वसूली और एक संगठित सिंडिकेट का दावा किया था। हालांकि सभी कोयला कारोबार को अवैध कहना गलत होगा, वैध और अवैध खनन में फर्क करना जरूरी है।
भू-धंसान बना सबसे बड़ा खतरा
आसनसोल-रानीगंज बेल्ट की सबसे डरावनी समस्या है भू-धंसान। पुरानी भूमिगत खदानों के ऊपर बसे कई गांवों में जमीन के नीचे खोखला होने से अचानक जमीन धंस जाती है। जुलाई 2026 में अंडाल में हुई ऐसी ही घटना में कई घरों में दरारें आईं और परिवारों को घर छोड़ना पड़ा था।
ADDA के अनुसार, DGMS ने पूरे रानीगंज कोलफील्ड में 142 जगहों को भू-धंसान के लिहाज से अतिसंवेदनशील घोषित किया है। राज्य सरकार के आवास विभाग द्वारा प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए योजना चलाई जा रही है, जिसमें आसनसोल और दुर्गापुर के प्रभावित परिवारों को सुरक्षित जगह पर बसाने का प्रावधान है।
सुरक्षा और रोजगार दोनों हैं चुनौती
आज आसनसोल-दक्षिण के सामने दोहरी चुनौती है – एक तरफ कोयले पर आधारित रोजगार को बचाए रखना और दूसरी तरफ लोगों को सुरक्षित भविष्य देना। विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई, बंद पड़ी खदानों का वैज्ञानिक तरीके से भराव और प्रभावित लोगों के लिए वैकल्पिक रोजगार ही इस समस्या का स्थायी समाधान हो सकता है।














