शंभू झा के एक पोस्ट ने छेड़ दी बहस – बोले, बड़े उद्योगपति का कर्ज माफ तो आम आदमी का क्यों नहीं?
आसनसोल । क्या कानून सच में सबके लिए बराबर है? इसी सवाल को लेकर शहर के जाने-माने सामाजिक चिंतक सह आसनसोल चेंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव शंभू झा की एक पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी है।
“समानता का सवाल” नाम से लिखी अपनी पोस्ट में शंभू झा ने न्याय व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकत – Precedent यानी उदाहरण – को आधार बनाकर एक तीखा सवाल उठाया है।
पोस्ट में क्या लिखा है?
शंभू झा ने लिखा है कि भारत के किसी भी कोने की अदालत का महत्वपूर्ण फैसला दूसरे प्रदेशों की अदालतों में मिसाल के तौर पर पेश किया जाता है। इसी परंपरा पर उन्होंने दो बड़े सवाल खड़े किए हैं –
पहला सवाल – कर्ज माफी पर:
अगर बड़े-बड़े उद्योगपतियों के हजारों-करोड़ों के कर्ज माफ किए जा सकते हैं, तो कल को एक आम किसान, छोटा व्यापारी या नौजवान भी यही मिसाल देकर अपना कर्ज माफ करने की मांग करेगा तो उसे कैसे रोका जाएगा?
दूसरा सवाल – राहत पर:
अगर धोखाधड़ी या गबन के किसी बड़े मामले में किसी प्रभावशाली व्यक्ति को अदालत से राहत मिल जाती है, तो क्या भविष्य में उसी तरह के मामले में फंसा कोई आम आरोपी भी उसी फैसले का हवाला देकर उसी राहत की मांग नहीं करेगा?
और अंत में उन्होंने सबसे बड़ा सवाल पूछा है – “फिर न्याय व्यवस्था में समानता का सिद्धांत कहाँ रहेगा?”
“यह किसी व्यक्ति विशेष के लिए नहीं”
शंभू झा ने साफ किया है कि उनका यह सवाल किसी एक व्यक्ति के पक्ष या विपक्ष में नहीं है, बल्कि यह पूरे सिस्टम के लिए एक वैचारिक सवाल है। उनकी इस पोस्ट के नीचे कानून – न्याय – समानता का संदेश दिया गया है।
इस पोस्ट के वायरल होने के बाद लोगों में जमकर चर्चा हो रही है। कई लोगों का कहना है कि शंभू झा ने आम आदमी के मन की बात कह दी है – न्याय सिर्फ किताबों में नहीं, जमीन पर भी बराबर दिखना चाहिए।














