हक की लड़ाई: आदिवासियों का 30 KM पैदल मार्च रोकने पर NH-19 पर हाई वोल्टेज ड्रामा, जामुड़िया से रानीगंज तक पुलिस का पहरा
रानीगंज / जामुड़िया। अपने हक और सालों से लटकी मांगों को लेकर मंगलवार को हजारों आदिवासी सड़क पर उतर आए। हाथों में बैनर और न्याय की उम्मीद लिए ये प्रदर्शनकारी जामुड़िया से आसनसोल डीएम ऑफिस तक करीब 30 किलोमीटर पैदल मार्च करना चाहते थे। लेकिन राष्ट्रीय राजमार्ग 19 (NH-19) पर पुलिस ने उन्हें रोक दिया, जिसके बाद कुनुस्तोड़िया और पंजाबी मोड़ पर घंटों तक गतिरोध और तनाव की स्थिति बनी रही।
NH पर पुलिस का कड़ा पहरा, वाटर कैनन और RAF तैनात
पैदल मार्च की सूचना मिलते ही सुबह से ही पुलिस-प्रशासन अलर्ट हो गया। जामुड़िया और रानीगंज में भारी पुलिस बल, बैरिकेडिंग, वज्र वाहन, वाटर कैनन, कॉम्बैट फोर्स, RAF और केंद्रीय बलों को तैनात कर दिया गया। कुनुस्तोड़िया मोड़ पर जब जुलूस को आगे बढ़ने से रोका गया तो माहौल कुछ देर के लिए तनावपूर्ण हो गया।
प्रशासन का कहना था कि सुरक्षा कारणों से NH-19 पर पैदल जुलूस की अनुमति नहीं दी जा सकती। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को बसों से ले जाने का प्रस्ताव दिया, लेकिन आंदोलनकारियों ने साफ मना कर दिया। उनका कहना था – “हम टकराव नहीं, अपनी आवाज डीएम तक पहुंचाने आए हैं, और पैदल ही जाएंगे।”
आदिवासियों की 7 बड़ी मांगें क्या हैं?
1. पंडित रघुनाथ मुर्मू आवासीय विद्यालय के हॉस्टल में 12 स्थायी पदों पर तुरंत भर्ती की जाए।
2. कांकसा के PRMMS इंग्लिश मीडियम स्कूल की 2017 से बंद फीडर ग्रांट दोबारा शुरू हो।
3. जामुड़िया के शालडांगा में ECL के OCP विस्तार से पहले जमीन का पट्टा और सही पुनर्वास दिया जाए।
4. OCP से प्रभावित गांव वालों को उचित मुआवजा और पुनर्वास पैकेज मिले।
5. FRA 2006 कानून के तहत बांसगड़ा पूर्व ग्रामसभा को मान्यता दी जाए।
6. IQ City प्रोजेक्ट में जमीन गंवाने वाले 27 परिवारों को नौकरी दी जाए।
7. SIR 2026 में वोटर लिस्ट से हटाए गए आदिवासी वोटरों के नाम फिर से जोड़े जाएं।
फिलहाल प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत जारी है। एक तरफ कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी तो दूसरी तरफ अपने अधिकारों की लड़ाई – अब देखना है कि इसका हल कैसे निकलता है।














