कॉलेज-यूनिवर्सिटी शिक्षकों के ट्रांसफर बिल पर बंगाल में नई बहस, शिक्षक संगठनों ने बताया ‘क्रांतिकारी कदम’
आसनसोल | शिल्पांचल टुडे
राज्य सरकार द्वारा कॉलेज और विश्वविद्यालय के शिक्षकों के ट्रांसफर को लेकर लाए गए नए नियम पर शिक्षक संगठनों ने खुलकर समर्थन किया है। शिक्षक नेताओं ने इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में एक बड़ा और सकारात्मक कदम बताया है।
‘ट्रांसफर को नकारात्मक नहीं, सकारात्मक नजरिए से देखें’
एक वरिष्ठ शिक्षक नेता ने कहा कि इस फैसले को नकारात्मक से ज्यादा सकारात्मक नजरिए से देखने की जरूरत है। उन्होंने कहा, “शिक्षा देना और लेना दोनों का विषय है। अगर किसी नामी संस्थान या बड़े विश्वविद्यालय के अनुभवी शिक्षक को जिले के किसी विश्वविद्यालय में 3-4 साल पढ़ाने का मौका मिलता है, तो यह उस जिले के छात्रों के लिए एक सुनहरा अवसर होगा।”
उन्होंने आगे कहा कि इसी तरह जिले के किसी छोटे विश्वविद्यालय के शिक्षक को कोलकाता जैसे बड़े शहर की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में 2-3 साल पढ़ाने का मौका मिलेगा, तो यह उनके लिए भी करियर का एक नया अवसर होगा। “ट्रांसफर नहीं होता है, इसका मतलब यह नहीं कि यह कभी हो ही नहीं सकता। ऐसी कठोर मानसिकता रखना ठीक नहीं है। हम शिक्षक के तौर पर इस बिल का स्वागत करते हैं।”
छोटी यूनिवर्सिटीज को मिलेगा फायदा
शिक्षक नेताओं ने बताया कि बंगाल में कई नई और छोटी यूनिवर्सिटीज ऐसी हैं जहां एक भी परमानेंट टीचर नहीं है, कहीं तो सिर्फ एक टीचर के भरोसे पूरी यूनिवर्सिटी चल रही है। वहीं दूसरी तरफ कई बड़ी यूनिवर्सिटीज में अनुभवी टीचर हैं लेकिन विद्यार्थी कम हैं।
ऐसे में नई भर्ती में समय लगेगा, तब तक अगर अनुभवी टीचरों को 1 साल, 2 साल या 10 साल के लिए इन नई यूनिवर्सिटीज में भेजा जाता है तो वहां के छात्रों को अच्छे शिक्षकों से सीखने का मौका मिलेगा और एक बेहतर शैक्षणिक माहौल बनेगा।
TMC सरकार पर निशाना
एक शिक्षक नेता ने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा, “पिछले 10-15 सालों में पश्चिम बंगाल की शिक्षा कहाँ पहुँच गई है, आप सबने देखा है। एक शिक्षक का समाज में जो सम्मान था, तृणमूल सरकार ने उसे इतना नीचे गिरा दिया कि शिक्षक को सड़क पर अपनी पहचान बताने में भी डर लगता है और यह साबित करने की कोशिश की गई कि उसने पैसे देकर नौकरी पाई है। TMC ने शिक्षा में अस्वस्थ माहौल पैदा किया है। हम नहीं चाहते कि बंगाल में वह बुरा दिन फिर लौटे।”
कुल मिलाकर शिक्षक संगठनों का मानना है कि समग्र पश्चिम बंगाल की शिक्षा संरचना के विकास के लिए यह ट्रांसफर बिल सही दिशा में उठाया गया कदम है।














