बंगाल की धरती से हिंदी के सम्मान का शंखनाद – आसनसोल में अखिल भारतीय हिंदी महासभा की राष्ट्रीय संगोष्ठी, राष्ट्रभाषा और महिला सशक्तिकरण पर जोर
आसनसोल | शिल्पांचल टुडे
हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार और राष्ट्रीय एकता के उद्देश्य को लेकर अखिल भारतीय हिंदी महासभा द्वारा पश्चिम बंगाल में एक भव्य राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक कार्यक्रम को लेकर संगठन के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री अमित रजक ने आसनसोल में प्रेस को संबोधित करते हुए विस्तृत जानकारी दी।
माँ दुर्गा की धरती से राष्ट्रीय उद्घोष
अमित रजक ने कहा कि बंगाल माँ दुर्गा की भूमि है और इस पावन धरती को वंदन करते हुए यह राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जा रही है। उन्होंने कहा, “पूरे पश्चिम बंगाल में इसका साक्षी जयघोष आज आसनसोल की धरती से हो रहा है और यह जयघोष पूरे भारतवर्ष में गूंजेगा। यह केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय आंदोलन है।”
महिला सशक्तिकरण को मिलेगा बल
उन्होंने बताया कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य बहुत व्यापक है। अखिल भारतीय हिंदी महासभा देश में हाल ही में पारित हुए महिला आरक्षण विधेयक का पूर्ण समर्थन करती है।
उन्होंने कहा, “राष्ट्र निर्माण में महिलाओं की भागीदारी अनिवार्य है। चाहे वह नर्स के रूप में हो, शिक्षिका के रूप में हो, विधायिका या सांसद के रूप में हो, महिलाओं का योगदान हर क्षेत्र में होना चाहिए। हम चाहते हैं कि महिलाएं सशक्त हों और देश के विकास में बराबर की भागीदार बनें।”
हिंदी ही जोड़ सकती है पूरे भारत को
राष्ट्रभाषा के मुद्दे पर बोलते हुए अमित रजक ने कहा कि जैसे हमारे देश का एक राष्ट्रीय पशु, एक राष्ट्रीय पक्षी और एक राष्ट्रीय ध्वज है, वैसे ही देश की एक सम्पर्क भाषा भी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “अखिल भारतीय हिंदी महासभा का मानना है कि समन्वय, एकता और विकास के लिए एक कनेक्टिंग लैंग्वेज की जरूरत है और हिंदी से बेहतर कोई भाषा नहीं हो सकती। आज हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी विदेशों में जाकर हिंदी में भाषण देते हैं, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत जी का उद्बोधन हिंदी में होता है, जिसे अलग-अलग भाषा के लोग सुनते हैं और समझने का प्रयास करते हैं। यही हिंदी की ताकत है।”
माँ और मौसी जैसा है हिंदी-बांग्ला का रिश्ता
बंगाल में हिंदी को लेकर उठने वाले सवालों पर उन्होंने बेहद खूबसूरत उदाहरण दिया। उन्होंने कहा, “आप अपनी मातृभाषा बांग्ला के लिए काम कर रहे हैं, यह बहुत अच्छी बात है, लेकिन राष्ट्रभाषा के लिए भी काम करें। हिंदी और बांग्ला का रिश्ता माँ और मौसी जैसा है। जैसे मेरी मातृभाषा हिंदी है और मेरे भाई की मातृभाषा बांग्ला है, तो दोनों का आदर और घनिष्ठ संबंध होना चाहिए।”
अब हर वर्ग के युवा जुड़ रहे हैं हिंदी से
अमित रजक ने बताया कि पहले केवल हिंदी साहित्य के विद्यार्थी ही हिंदी के लिए काम करते थे, लेकिन अब संगठन ने इसे व्यापक रूप दिया है। अब भूगोल, इतिहास, विज्ञान, कॉमर्स समेत अलग-अलग संकायों के विद्यार्थी भी बड़े उत्साह के साथ हिंदी के प्रचार के लिए संगठन से जुड़ रहे हैं और काम कर रहे हैं।
उन्होंने अंत में कहा कि बंगाल की इस धरती से जो उद्घोष हो रहा है, वह पूरे देश में एक नई चेतना और एकता का संचार करेगा।















