बाँकुड़ा में माओवादी संगठन को बड़ा झटका – दो दशक बाद 3 टॉप कमांडरों ने AK-47 समेत किया सरेंडर, 80 केस दर्ज
बाँकुड़ा, शिल्पांचल टुडे
जंगलमहल में शांति की एक बड़ी खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल के बाँकुड़ा में प्रतिबंधित भाकपा (माओवादी) के तीन शीर्ष नेताओं ने बुधवार को हथियार डाल दिए। दो दशक तक भूमिगत रहने के बाद उन्होंने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया।
आत्मसमर्पण करने वालों में जाबा महतो उर्फ बुलू, नयनतारा साहू उर्फ मीता और रामप्रसाद मंडी उर्फ सचिन शामिल हैं।
पुलिस लाइन में AK-47 और INSAS जमा
बाँकुड़ा पुलिस लाइन के कॉन्फ्रेंस हॉल में पश्चिमी क्षेत्र के ADG आनंद कुमार और SP पी.वी.जी. सतीश के सामने तीनों ने हथियार सरेंडर किए।
पुलिस ने बताया कि उनके पास से 1 AK-47, 2 INSAS राइफल, 10 मैगजीन और 154 जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।
कौन हैं ये तीनों?
पुलिस के अनुसार, जाबा महतो और नयनतारा साहू माओवादियों की जोनल कमेटी की सदस्य थीं, जबकि रामप्रसाद मंडी बंगाल-झारखंड-ओडिशा रीजनल कमेटी का अहम चेहरा था। इनका नेटवर्क बाँकुड़ा, पुरुलिया, झाड़ग्राम, पश्चिम मेदिनीपुर से लेकर झारखंड के कोल्हान तक फैला था।
तीनों के खिलाफ 75 से 80 से ज्यादा मामले दर्ज हैं। इनमें हत्या, UAPA, आर्म्स एक्ट और विस्फोटक एक्ट जैसे गंभीर मामले शामिल हैं।
अब क्या होगा?
ADG आनंद कुमार ने कहा कि सरकार की आत्मसमर्पण नीति के तहत इनके पुनर्वास के लिए स्क्रीनिंग कमेटी को प्रस्ताव भेजा जाएगा। लेकिन सरेंडर के बाद भी इनके खिलाफ दर्ज पुराने आपराधिक मामलों में कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।
पुलिस इसे जंगलमहल में माओवाद के खात्मे की दिशा में एक बड़ी सफलता मान रही है।














