नवरात्रि के दूसरे दिन करें मां ब्रह्मचारिणी की पूजा, जानें स्वरूप, पूजा विधि और महिमा – पंडित हेमंत मिश्रा
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
शारदीय नवरात्रि के दूसरे दिन माँ भगवती के ब्रह्मचारिणी स्वरूप की पूजा की जाती है। देवी का यह रूप तपस्या, संयम, और साधना का प्रतीक है। ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत मिश्रा (MAJY) ने दूसरे दिन की पूजा विधि और स्वरूप की पूरी जानकारी दी है।
मां ब्रह्मचारिणी का स्वरूप और महिमा
– *नाम का अर्थ:* ‘ब्रह्म’ का अर्थ तपस्या है और ‘चारिणी’ का अर्थ आचरण करने वाली यानी तप का आचरण करने वाली।
– *स्वरूप:* माँ ब्रह्मचारिणी के दाहिने हाथ में जप की माला और बाएं हाथ में कमंडल रहता है। यह शांत, श्वेत वस्त्रधारी और अत्यंत तेजोमय स्वरूप है।
पूजा विधि (द्वितीय दिवस)
– स्नान और संकल्प:
– प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ (विशेषकर सफेद या पीले) वस्त्र धारण करें।
– माँ का स्मरण कर व्रत और पूजन का संकल्प लें।
– पूजा सामग्री:
– माँ ब्रह्मचारिणी को सफेद या पीले रंग के वस्त्र और कमल का फूल अत्यंत प्रिय है।
– भोग के लिए चीनी, पंचामृत, और मिश्री का विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा फल और मिष्ठान अर्पित करें।
– पूजन अनुष्ठान:
– चौकी पर माँ ब्रह्मचारिणी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
– सबसे पहले गणेश जी और नवग्रहों का ध्यान कर पूजन करें।
– अब माँ को रोली, अक्षत, चंदन, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
– माँ को सफेद फूल और विशेष रूप से कमल या गुलाब भेंट करें।
– मंत्र जाप और स्तुति
– पूजन के दौरान माँ के बीज मंत्र या उनके इस प्रसिद्ध श्लोक का जाप करें:
या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः
– आरती और क्षमा प्रार्थना:
– अंत में कपूर या घी के दीपक से माँ ब्रह्मचारिणी की आरती उतारें।
– पूजा में हुई किसी भी भूल-चूक के लिए क्षमा प्रार्थना करें और प्रसाद वितरित करें।
पंडित हेमंत मिश्रा, ज्योतिषाचार्य (MAJY), मो. 9332449502
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