एक ईंट-एक रुपया से समाजवाद का दिया संदेश, आसनसोल में हर्षोल्लास से मनी महाराजा अग्रसेन जयंती
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
अग्रकुल के प्रवर्तक और समाजवाद के प्रणेता महाराजा अग्रसेन की जयंती रविवार शाम को आसनसोल में बड़े ही धूमधाम से मनाई गई। पश्चिम बंग प्रादेशिक मारवाड़ी सम्मेलन आसनसोल एवं श्री श्याम सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में राहा लेन स्थित श्री श्याम मंदिर परिसर में आयोजित इस भव्य समारोह में श्रद्धा और उल्लास का अनोखा संगम देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाराजा अग्रसेन की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इसके बाद भजन संध्या और महाआरती का आयोजन किया गया, जिससे पूरा परिसर भक्तिमय हो गया।
कौन थे महाराजा अग्रसेन?
महाराजा अग्रसेन सूर्यवंशी क्षत्रिय थे और प्रतापनगर के राजा वल्लभ के पुत्र थे। उन्होंने नागराज कन्या माधवी से विवाह किया था। कहा जाता है कि उन्होंने 5 हजार वर्ष पूर्व अग्रोहा गणराज्य की स्थापना की थी। उन्होंने अपने राज्य में एक अनोखी परम्परा शुरू की थी – जो भी व्यक्ति बाहर से आकर अग्रोहा में बसता था, राज्य का हर परिवार उसे एक ईंट और एक रुपया सहयोग के रूप में देता था, ताकि वह अपना घर और व्यापार स्थापित कर सके। यही समाजवाद और समानता का सबसे बड़ा उदाहरण है। उन्होंने यज्ञ में पशु बलि का विरोध किया और अहिंसा का संदेश दिया।
इस अवसर पर सम्मेलन के अध्यक्ष नरेश अग्रवाल ने कहा, “महाराजा अग्रसेन जी ने हजारों साल पहले ही समाज में पूंजीवाद और असमानता को खत्म करने का मंत्र दे दिया था। उनका एक ईंट, एक रुपया का सिद्धांत आज के स्टार्टअप इंडिया और सहयोग की भावना से बिल्कुल मेल खाता है। वे एक सच्चे लोकतंत्रवादी और समाज सुधारक थे। उनका जीवन हमें सिखाता है कि व्यापार में ईमानदारी और समाज में सहयोग से ही तरक्की संभव है।”
उन्होंने कहा कि जयंती मनाने का उद्देश्य केवल पूजा-पाठ नहीं, बल्कि उनके आदर्शों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।
समारोह में समाज के 20 वरिष्ठ नागरिकों और 20 सामाजिक संस्थाओं को समाज सेवा के लिए सम्मानित किया गया। मंदिर सभाहाल में महाराजा अग्रसेन के जीवन पर आधारित चित्र प्रदर्शनी भी लगाई गई है, जो दो दिनों तक चलेगी।
इस मौके पर सचिव अनिल मोहनका, श्याम सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष सीता राम बगड़िया, सचिव दीपक तोदी, मनोज मुकिम, शंकर लाल शर्मा, मुकेश अग्रवाल, मुकेश तोदी, राजेश पंसारी, कुणाल अग्रवाल, आशीष केडिया सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।














