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नवरात्रि के चौथे दिन करें माँ कूष्मांडा की आराधना, मिलेगा सूर्य दोष से छुटकारा – जानें विधि, मंत्र और शुभ रंग: ज्योतिषाचार्य हेमंत मिश्रा

शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
शारदीय नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन की पूजा से जीवन में तेज, यश, आयु और बल की प्राप्ति होती है। इसी विषय पर प्रसिद्ध *ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत मिश्रा (MAJY) ने भक्तों के लिए पूजा के नियम, विधि और सावधानियों की विस्तृत जानकारी दी है।

ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत मिश्रा ने बताया कि नवरात्रि के चौथे दिन माँ दुर्गा के चौथे स्वरूप माँ कूष्मांडा की पूजा की जाती है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन का विशेष महत्व है।

पंडित जी के अनुसार, नवरात्रि के चौथे दिन के नियम, पूजा-विधि और पालन करने योग्य बातें इस प्रकार हैं:

1. माँ कूष्मांडा का स्वरूप और महत्व

– नाम का अर्थ: ‘कु+उष्म+अंडा’ यानी जिनका त्रैविध तापयुक्त ब्रह्मांड (संसार) उनकी मंद हंसी द्वारा उत्पन्न हुआ हो, वे माँ कूष्मांडा हैं।
– अधिष्ठात्री देवी: माँ कूष्मांडा को सूर्य देव का मार्गदर्शन और नियंत्रण करने वाली देवी माना जाता है, इसलिए इनकी पूजा से सूर्य ग्रह के दोष शांत होते हैं और भक्तों को तेज, आयु, यश और बल की प्राप्ति होती है।

2. चौथे दिन की पूजा के नियम एवं विधि

– रंग का महत्व: इस दिन हरा (Green) रंग पहनना बहुत शुभ माना जाता है, क्योंकि यह हरियाली, प्रकृति, शांति और समृद्धि का प्रतीक है।
– स्नान और शुद्धि: प्रातः काल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। मंदिर और पूजा स्थल की अच्छी तरह से सफाई करें।
– कलश और माँ की स्थापना: यदि आपने घटस्थापना की है, तो सबसे पहले गणेश-अंबिका, नवग्रह और कलश का स्मरण करें। इसके बाद माँ कूष्मांडा की प्रतिमा या चित्र को चौकी पर स्थापित करें।
– पूजा सामग्री: माँ को अक्षत (चावल), रोली, सिंदूर, लाल पुष्प, और श्रृंगार का सामान अर्पित करें।
– भोग (प्रसाद): माँ कूष्मांडा को मालपुआ या पेठा बहुत प्रिय है। इस दिन मालपुए का भोग लगाने से माँ अत्यंत प्रसन्न होती हैं और भक्तों को बुद्धि व विवेक का वरदान देती हैं। इसके बाद भोग ब्राह्मण को दान या कन्याओं में वितरित किया जा सकता है।

3. महत्वपूर्ण नियम व सावधानियां

– मंत्र जाप: पूजा के दौरान माँ के इस बीज मंत्र का कम से कम एक माला (108 बार) जाप अवश्य करें:
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं कूष्मांडायै नमः

– कवच पाठ: इस दिन माँ कूष्मांडा के कवच का पाठ करने से सभी प्रकार के भय और कष्ट दूर होते हैं।
– सात्विकता: नवरात्रि के चौथे दिन भी पूर्ण रूप से सात्विक आहार और आचरण का पालन करें। ब्रह्मचर्य नियमों का पालन करें और मन में सकारात्मक विचार रखें।
– कन्या पूजन या सेवा: यदि आप नौ दिनों तक कन्या पूजन या व्रत के नियमों का पालन कर रहे हैं, तो बड़े-बुजुर्गों का आदर करें और किसी भी जरूरतमंद को भोजन या फल का दान अवश्य करें।

पंडित हेमंत मिश्रा
ज्योतिषाचार्य (MAJY)
❤️ जय बजरंगबली 🙏🏻
Mb 9332449502

 

  

        

 

 

 

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