नवरात्रि के पांचवें दिन करें माँ स्कंदमाता की पूजा, मिलेगा संतान सुख, बुद्धि और तेज का आशीर्वाद
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
शारदीय नवरात्रि का पर्व माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना का पर्व है। नवरात्रि के पांचवें दिन माँ दुर्गा के पांचवें स्वरूप माँ स्कंदमाता की पूजा का विशेष विधान है। माँ स्कंदमाता कार्तिकेय (स्कंद) की माता हैं, इसलिए इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। कमल के आसन पर विराजमान होने के कारण इन्हें पद्मासना देवी के नाम से भी जाना जाता है।
मान्यता है कि पंचमी तिथि पर माँ स्कंदमाता की विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों को बल, ज्ञान, तेज और संतान सुख की प्राप्ति होती है।
पंडित हेमंत मिश्रा (ज्योतिषाचार्य – MAYJ) ने बताई पूजा की पूरी विधि –
1. प्रातः स्नान और संकल्
पंचमी तिथि के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ (संभव हो तो पीले या सफेद रंग के) वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल या मंदिर को गंगाजल छिड़क कर पवित्र कर लें।
2. पूजा सामग्री और स्थापना
लकड़ी की चौकी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाकर मां स्कंदमाता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। मां को पीले रंग के पुष्प (विशेषकर कमल या पीले गेंदे के फूल), अक्षत, रोली, कुमकुम और श्रृंगार का सामान अर्पित करें। प्रसाद में मां को केले का फल या पीले रंग की मिठाई अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा पंचामृत और मिष्ठान का भोग लगाएं।
3. पूजन विधि (अर्चन)
घी का दीपक और धूप जलाकर मां का आह्वान करें। पूजा के अंत में कपूर या घी के दीपक से मां स्कंदमाता की आरती करें और परिवार के सुख-समृद्धि की कामना करें।
4. विशेष महत्व और लाभ
भगवान स्कंद (कार्तिकेय) बाल रूप में मां की गोद में बैठे हैं, इसलिए माता अपने भक्तों की संतान की रक्षा करती हैं और उन्हें आरोग्य प्रदान करती हैं। इनकी पूजा से साधक को मोक्ष और अलौकिक तेज की प्राप्ति होती है।
पंडित हेमंत मिश्रा
ज्योतिषाचार्य (MAYJ)
❤️ जय बजरंगबली 🙏
