1952 से जल रही है आस्था की ज्योति: आसनसोल के बस्तीन बाजार में खिला फूलों जैसा पंडाल, 24 घंटे खुला है माँ के दरबार का द्वार
शिल्पांचल टुडे, आसनसोल।
कहते हैं कुछ पूजाएं सिर्फ पूजा नहीं, शहर की धड़कन होती हैं। आसनसोल के बस्तीन बाजार की सर्वजननी दुर्गापूजा ऐसी ही एक धड़कन है, जो पिछले 73 सालों से, 1952 से लगातार धड़क रही है। इस साल यह पूजा अपने दो कारणों से पूरे आसनसोल में चर्चा का केंद्र बनी हुई है – एक तो फूल के आकार का अलौकिक पंडाल और दूसरा, माँ के भक्तों के लिए 24 घंटे दर्शन की व्यवस्था।
विधायक ने किया शुभारंभ, उमड़ा जनसैलाब
बीते दिन आसनसोल उत्तर के लोकप्रिय विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी के कर-कमलों द्वारा इस ऐतिहासिक पूजा का भव्य उद्घाटन किया गया। विधायक के पहुंचते ही पूरा बस्तिन बाजार ‘बोलो दुर्गा माई की जय’ के जयकारों से गूंज उठा। उद्घाटन समारोह में हजारों श्रद्धालु मौजूद थे।
फूलों जैसा पंडाल देख हर कोई कह रहा है – वाह!
इस बार पूजा कमेटी ने थीम से हटकर कुछ अलग करने की सोची। पूरा पंडाल एक विशाल, खिले हुए फूल के आकार में बनाया गया है। रात में जब रंग-बिरंगी लाइटें इस पंडाल पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है जैसे माँ दुर्गा खुद एक कमल के फूल पर विराजमान हों। दूर-दूर से लोग सेल्फी और फोटो लेने के लिए यहां आ रहे हैं। यह पंडाल बंगाल की उस कला का प्रतीक है, जहां भक्ति के साथ सृजन भी होता है।
अब नहीं होंगे बंद माँ के कपाट, 24 घंटे दर्शन
इस पूजा की सबसे बड़ी और भक्तों के दिल को छू लेने वाली बात है – 24 घंटे दर्शन।
पूजा कमेटी के सदस्यों ने बताया कि एक समय विवाद के चलते मंदिर के कपाट अक्सर बंद हो जाते थे, जिससे माँ के भक्तों को निराश होकर लौटना पड़ता था।
कमेटी का दावा है कि राज्य में सत्ता परिवर्तन और विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी के विशेष सहयोग के बाद इस ऐतिहासिक मंदिर के कपाट अब श्रद्धालुओं के लिए पूरे दिन-रात खुले रहेंगे। चाहे आधी रात हो या सुबह 4 बजे, अब कोई भी भक्त आकर माँ के दर्शन कर सकता है। इस फैसले से स्थानीय लोगों में खुशी की लहर है।
सिर्फ पूजा नहीं, विरासत है बस्तिन बाजार
आसनसोल एक औद्योगिक शहर है, जहां लोहे और कोयले की बात ज्यादा होती है। लेकिन बस्तिन बाजार जैसी पूजाएं इस शहर को दिल से जोड़ती हैं। 1952 में कुछ युवाओं ने जो छोटा सा दिया जलाया था, आज वह एक विशाल सांस्कृतिक महोत्सव बन गया है।
यह पूजा नई पीढ़ी को सिखाती है कि आधुनिकता के साथ अपनी जड़ों को कैसे जिंदा रखा जाता है। फूलों सा पंडाल, 73 साल पुरानी परंपरा और 24 घंटे खुला दरबार – यही वजह है कि इस बार दुर्गा पूजा में बस्टिन बाजार की पूजा को देखने जरूर जाना चाहिए।














