देवी पक्ष में मां दुर्गा की विदाई नहीं मां दुर्गा के हमेशा साथ रहने का परिचायक है एकदिवसीय दुर्गापूजा
बर्नपुर(भरत पासवान)। महालया के साथ ही पूरा शिल्पांचल दुर्गापूजा के रंग में रंगने लगा है। एक तरफ जहां विभिन्न दुर्गा पूजा कमेटियां दुर्गापूजा आयोजन को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। महालया के दिन पितृ पक्ष के समापन के साथ देवीपक्ष की शुरुआत होती है। वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बर्दवान जिला के बर्नपुर के दामोदर नदी के किनारे स्थित धेनुआ गांव में 46 वर्षों से अनोखी एकदिवसीय दुर्गापूजा का आयोजन महालया के दिन रविवार की सुबह किया गया। धेनुआ गांव स्थित कालीकृष्ण योगाश्रम में महालया की सुबह मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर मां दुर्गा के आगमनी से लेकर दशमी की पूजा की गई। इस अनोखी दुर्गापूजा में मां दुर्गा के कुंवारी रूप गौरी महामाया की पूजा होती है।
यहां मां दुर्गा अपने महामाया रूप में अपनी सखियों जया तथा विजया के साथ पूजी जाती है। वहीं पूजा में शामिल लेने के लिये आस- पास गांव के साथ दूसरे जिले से भी काफी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। कालीकृष्ण योगाश्रम गौरी केदारनाथ मंदिर कमेटी के पुजारी नारायण दत्त ने बताया कि योगाश्रम में वर्ष 1979 से लगातार एकदिवसीय दुर्गापूजा का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि तेजानंद ब्रह्मचारी असम से वर्ष 1977 को इस आश्रम में पहुंचे थे तथा वर्ष 1979 से इस एकदिवसीय दुर्गापूजा की शुरूआत की। वर्ष 2003 में उनका देहांत होने के पश्चात मंदिर कमेटी द्वारा इस दुर्गापूजा का संचालन किया जा रहा है। पूजा के पश्चात श्रद्धालुओं में प्रसाद के साथ खिचड़ी भोग वितरित किया गया। उन्होंने बताया कि एक दिवसीय पूजा के तहत केवल कोला बऊ का विसर्जन किया जाता है। मंदिर दुर्गापूजा में खाली नहीं रहे इसलिए एकादशी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। यहां की अनोखी दुर्गापूजा देवीपक्ष में मां दुर्गा की विदाई नहीं बल्कि मां दुर्गा के हमेशा साथ रहने का परिचायक है। वहीं इस वर्ष एक दिवसीय दुर्गापूजा में महिला ढाकियों द्वारा ढाक बजाकर प्रस्तुति लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र रही।





















