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श्रमिक संगठनों ने चार नए श्रम संहिताओं को रद्द करने की मांग की, अधिकारों के हनन का आरोप

आसनसोल । असंगठित श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के एक समूह ने भारत सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त को एक पत्र भेजकर चार नए श्रम संहिताओं (लेबर कोड) को रद्द करने की मांग की है। इसे लेकर असंगठित श्रमिकों और ट्रेड यूनियनों के सैकड़ों समर्थकों ने बीएनआर मोड़ से रैली करके रीजनल लेबर कमिनशनर कार्यालय पहुंचा। कार्यालय के सामने प्रदर्शन करके विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन की कॉपी रीजनल लेबर कमिनशनर के मार्फत भारत सरकार के मुख्य श्रम आयुक्त को भेजा गया। इन संगठनों का आरोप है कि ये संहिताएं श्रमिकों के मौलिक अधिकारों का हनन करती हैं और नियोक्ताओं को लाभ पहुंचाने के लिए बनाई गई हैं।
आगे कहा गया है कि नए श्रम संहिताओं में “फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट” जैसे प्रावधान हैं, जो नियोक्ताओं को लगभग 98% श्रमिकों को नए वेतन संहिता से बाहर रखने की अनुमति देते हैं। इसके अलावा, न्यूनतम मजदूरी, सुरक्षा समितियों और महिलाओं के काम के घंटे एवं छुट्टी के अधिकारों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
संगठन यह भी दावा करते हैं कि ये कानून श्रमिकों के हितों को नियंत्रित करने के बजाय नियोक्ताओं को मजबूत बनाते हैं और ट्रेड यूनियन पंजीकरण की प्रक्रिया को जटिल बनाते हैं।

इस मौके पर असनसोल सिविल राइट्स एसोसिएशन, गणाधिकार मंच, ईसीएल ठेका श्रमिक अधिकार यूनियन, सीएसटीवी और अधिकार शामिल हैं।
श्रमिक संगठनों ने सरकार से इन चारों श्रम संहिताओं को समाप्त कर सरल, पारदर्शी और श्रमिक हितैषी कानून बनाने की मांग की है।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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