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‘आसनसोल में इंसानियत की मिसाल: समाजसेवी नितेश जिंदल का संकल्प- 1 लाख प्यासे होंठों तक पहुंचेगा ठंडा शरबत, 5000 पेड़ों से होगा शहर हरा-भरा’

आसनसोल, 26 मई 2026। जब सूरज आग उगल रहा है और लू के थपेड़े लोगों को घरों में कैद कर रहे हैं, ऐसे में आसनसोल के मारवाड़ी समाज के एक समाजसेवी नितेश कुमार जिंदल अपनी टीम के साथ सड़कों पर उतरकर इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं। तपती धूप में राहगीरों की प्यास बुझाने के लिए उन्होंने एक लाख लोगों तक ठंडा पानी और शरबत पहुंचाने का महासंकल्प लिया है।

“जब तक गर्मी, तब तक सेवा जारी रहेगी”
नितेश कुमार जिंदल ने बताया कि उनकी संस्था इस साल गर्मी में कम से कम 50 हजार से 1 लाख लोगों को राहत देने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसके लिए शहर के अलग-अलग भीड़भाड़ वाले इलाकों में कैंप लगाए जा रहे हैं। अब तक टीम दो सफल कैंप लगा चुकी है। तीन दिन पहले शनि मंदिर के सामने लगाए गए कैंप में सैकड़ों लोगों ने ठंडे शरबत से राहत पाई। जिंदल ने कहा, “गर्मी इतनी भयानक है कि लोग बेहाल हैं। हमारा एक ही मकसद है कोई भी प्यासा न रहे। जहां भी भीड़ दिखेगी, हमारा कैंप वहीं लगेगा।” अगला कैंप दो दिन बाद लगाने की तैयारी है।

सिर्फ गर्मी नहीं, हर मौसम में सेवा का जज्बा
जिंदल की समाजसेवा सिर्फ गर्मी तक सीमित नहीं है। उन्होंने बताया कि पिछले 2-3 साल से उनकी संस्था लगातार जरूरतमंदों की मदद कर रही है। कड़ाके की सर्दी में गरीबों-बेसहारों को कंबल और गर्म कपड़े बांटे जाते हैं। बरसात में जिन गरीब परिवारों के कच्चे घरों में पानी टपकता है, उनकी मदद के लिए भी टीम के तरफ से तिरपाल दिया जाता है।

बरसात में 5000 पेड़ों का हरित संकल्प
गर्मी से राहत के बाद जिंदल का अगला मिशन आसनसोल को हरा-भरा बनाना है। उन्होंने बताया कि अगले महीने मानसून शुरू होते ही शहर के अलग-अलग इलाकों में 5000 पेड़ लगाने का अभियान चलाया जाएगा। “पेड़ होंगे तो ऑक्सीजन होगी, और ऑक्सीजन होगी तो जीवन होगा,” जिंदल ने कहा। इस मुहिम का मकसद शहर का तापमान कम करना और पर्यावरण को बचाना है।

‘सेवा ही धर्म है’ – विनोद केडिया
यह पूछने पर कि नि:स्वार्थ सेवा से अपलोगों को क्या मिलता है, इस पर विनोद केडिया ने भावुक होकर बोले, “हमारी टीम का एक ही सिद्धांत है जिस वक्त जैसी जरूरत होगी, वैसी सेवा करेंगे। कोई गरीब दरवाजे पर आ जाए तो उसे खाली हाथ नहीं लौटने देंगे।”

आसनसोल की तपती सड़कों पर जब उनकी मारवाड़ी समाज की टीम “पानी-शरबत” की आवाज लगाती है, तो वो सिर्फ एक गिलास ठंडा पेय नहीं, बल्कि इंसानियत और उम्मीद का पैगाम बांटती है। मौके पर सूरज कुमार जिंदल भी उपस्थित थे।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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