बुधा गांव बना चुनावी जंग का मैदान’: आसनसोल में बीजेपी और टीएमसी आमने-सामने, झंडा लगाने पर बवाल, काउंसलर पर कमरे में बंद कर पीटने का सनसनीखेज आरोप
आसनसोल । पहले चरण के मतदान से महज 5 दिन पहले आसनसोल में चुनावी हिंसा ने सियासी माहौल में आग लगा दी है। आसनसोल साउथ थाना क्षेत्र के बुधा गांव में भाजपा कार्यकर्ता के साथ बर्बर मारपीट का सनसनीखेज आरोप लगा है। आरोप की सुई सीधे स्थानीय टीएमसी पार्षद शम्पा दा और उनके समर्थकों पर घूमी है।
कैसे भड़की हिंसा की चिंगारी?
घटना शनिवार दोपहर की है। पीड़ित की पत्नी और भाजपा की सक्रिय महिला कार्यकर्ता जयंती राय ने बताया कि उनके पति इलाके में माइक से प्रचार कर रहे थे और पोल पर भाजपा का झंडा बांध रहे थे। तभी टीएमसी से जुड़े अर्णव, दीपक और प्रदीप मौके पर पहुंचे।
आरोप है कि तीनों ने पहले झंडा लगाने से रोका। जब भाजपा कर्मी नहीं माने तो उन्हें भाजपा के पक्ष में प्रचार न करने की खुली धमकी दी गई। मामला यहीं नहीं रुका।
‘बातचीत के बहाने बुलाया, फिर दरवाजा बंद कर बरसाए लात-घूंसे’
जयंती राय का आरोप बेहद गंभीर है। उनके मुताबिक, थोड़ी देर बाद इलाके की टीएमसी काउंसलर शम्पा दा ने उनके पति को “बातचीत कर मामला सुलझाने” के बहाने एक कमरे में बुलाया।
“मेरे पति जैसे ही अंदर गए, पीछे से दरवाजा बंद कर दिया गया। उनका मोबाइल छीन लिया गया ताकि वे किसी को कॉल न कर सकें। इसके बाद उन पर लात-घूंसों की बारिश कर दी गई। उन्हें बेरहमी से पीटा गया,”जयंती राय ने रोते हुए बताया।
भाजपा हमलावर, कृष्णेंदु मुखर्जी थाने पहुंचे
घटना की जानकारी मिलते ही आसनसोल उत्तर से भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी समर्थकों के साथ आसनसोल साउथ थाने पहुंच गए। उन्होंने लिखित शिकायत दर्ज कराते हुए कहा, _”टीएमसी लोकतंत्र की हत्या कर रही है। चुनाव में हार के डर से हमारे कार्यकर्ताओं पर हमले करवा रही है। पुलिस 24 घंटे में आरोपियों को गिरफ्तार करे, वरना भाजपा सड़क पर उतरेगी।”_
टीएमसी का पलटवार: बीजेपी की साजिश, हमने भी की शिकायत’
उधर तृणमूल कांग्रेस ने सभी आरोपों को “सफेद झूठ और चुनावी स्टंट” करार दिया है। टीएमसी नेताओं का कहना है कि भाजपा खुद माहौल खराब कर सहानुभूति बटोरना चाहती है। पार्टी ने भी पलटवार करते हुए भाजपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ थाने में शिकायत दी है।
पुलिस के सामने सच की चुनौती
आसनसोल साउथ थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत पर FIR दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि मामले की हर एंगल से जांच की जा रही है। गांव में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी गई है।
23 अप्रैल से पहले बढ़ा सियासी पारा
पहले चरण में 23 अप्रैल को आसनसोल में वोटिंग है। उससे ठीक पहले हुई इस हिंसक झड़प ने पूरे शिल्पांचल का सियासी तापमान बढ़ा दिया है। भाजपा इसे TMC की “गुंडागर्दी” बता रही है, तो TMC इसे “भाजपा की नौटंकी”।
अब सबकी नजर पुलिस जांच पर टिकी है—क्या मतदान से पहले बुधा गांव की इस ‘कमरे में बंद हिंसा’ का सच सामने आ पाएगा?












