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वीआईपी गलियारों में उजाला, जनता के ऑपरेशन थिएटर में अंधेरा’: चुनाव से जंग तक, सत्ता की बत्ती सिर्फ अपने लिए जलती है – सुरेन जालान

आसनसोल । आज की दुनिया का सबसे कड़वा सच यही है राजनीति अपनी सुविधा के हिसाब से रोशनी बांटती है। वीआईपी गलियारों में हमेशा हाई वोल्टेज बल्ब जगमगाते हैं, लेकिन जहां जनता जनार्दन का ऑपरेशन होना है, जहां उसके भविष्य की सर्जरी होनी है, वहां अक्सर बत्ती बंद मिलती है। उक्त बातें आसनसोल के विशिष्ट व्यवसायी सुरेन जालान ने कही।

उन्होंने कहा कि चाहे अमेरिका-ईरान का युद्ध हो या भारत के किसी राज्य का चुनाव, स्क्रिप्ट एक ही है। सत्ता के केंद्र में बैठे लोग अपने लिए नीतियां, सुरक्षा, सुविधाएं सब ‘फुल लाइट’ में तय करते हैं। लेकिन आम आदमी को उसके हक, हिसाब और हालात समझने के लिए अंधेरे में टटोलना पड़ता है।

अंधेरे में भविष्य कैसे चुने जनता?
विडंबना देखिए—लोकतंत्र कहता है कि जनता जनार्दन के हाथ में सबकुछ है। वही सरकार बनाती है, वही गिराती है। लेकिन वीआइपी कल्चर की मोटी दीवार और लाल-नीली बत्ती की चकाचौंध के चलते जनता सही मूल्यांकन ही नहीं कर पाती। उसे पता ही नहीं चलता कि पर्दे के पीछे कौन-सा खेल चल रहा है, कौन-सी फाइल कहां दबा दी गई, किसके हिस्से का उजाला किसने चुरा लिया।

चुनाव आते हैं तो मंच से वादों की रोशनी फेंकी जाती है। युद्ध होते हैं तो ‘राष्ट्रीय हित’ की स्पॉटलाइट जला दी जाती है। मगर गांव के अस्पताल, स्कूल की छत, युवा की नौकरी, किसान की फसल—इन ऑपरेशन थिएटरों में बत्ती अब भी बंद है।

बत्ती का स्विच जनता के पास है
सुरेन जालान ने कहा कि सच यह भी है कि बत्ती का मेन स्विच अब भी जनता की उंगली के नीचे है। सवाल सिर्फ इतना है कि वह अंधेरे में स्विच टटोलने के बजाय एकजुट होकर पूरा पावर हाउस अपने हाथ में कब लेगी।

जब तक वीआइपी गलियारे और जनता का ऑपरेशन थिएटर अलग-अलग ग्रिड से बिजली लेंगे, तब तक भविष्य अंधेरे में ही भटकेगा। रोशनी सबकी है—या तो सबके लिए जले, या फिर सब मिलकर फ्यूज उड़ा दें।

क्योंकि लोकतंत्र में अंधेरा सिर्फ एक साजिश है, नियति नहीं।

 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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