बागेश्वर बाबा के पोस्टर जलाने के मामले में 4 दिन बाद जेल से रिहा हुए कांग्रेस नेता अरूप मुखर्जी, बाहर आते ही बीजेपी सरकार पर बोला हमला – बोले बंगाल में लोकतंत्र खत्म
आसनसोल | शिल्पांचल टुडे
बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की तस्वीर और पोस्टर का अपमान करने के आरोप में गिरफ्तार कांग्रेस नेता अरूप मुखर्जी को आखिरकार बुधवार को जमानत मिल गई। 4 दिनों तक आसनसोल सुधारागार (जेल) में रहने के बाद वह बाहर आए।
जेल गेट पर हीरो जैसा स्वागत
जेल से बाहर निकलते ही सीन किसी फिल्म से कम नहीं था। पहले से ही जेल के मुख्य गेट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जमा थी। ढोल-नगाड़ों, फूल-मालाओं और ‘अरूप मुखर्जी जिंदाबाद’ के नारों के साथ उनका भव्य स्वागत किया गया।
इस मौके पर आसनसोल दक्षिण विधानसभा ब्लॉक अध्यक्ष शाह आलम, पूर्व एस एम मुस्तफा, विश्वनाथ यादव, जिला के अन्य नेता सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने उन्हें कंधे पर उठा लिया और पूरे जेल परिसर में नारेबाजी की।
जेल से निकलते ही सरकार पर फूटा गुस्सा
जेल से बाहर आते ही अरूप मुखर्जी ने राज्य की भाजपा सरकार और पुलिस प्रशासन पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र नाम की कोई चीज नहीं बची है। बीजेपी सरकार विपक्ष की आवाज को दबाना चाहती है। अपनी बात रखना भी अब गुनाह हो गया है। मुझे राजनीतिक साजिश के तहत फंसाया गया।”
उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर कायम हैं और कोर्ट पर उन्हें पूरा भरोसा है।
क्या था पूरा मामला?
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने दुर्गा पूजा के दौरान मांसाहार का सेवन न करने की अपील की थी। उनकी इस अपील के बाद सियासत गरमा गई थी।
इसी के विरोध में आसनसोल के कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शहर में प्रदर्शन किया था और बागेश्वर बाबा के पोस्टर जलाए थे।
इस घटना के बाद भाजपा युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं की शिकायत पर ही आसनसोल दक्षिण थाने में मामला दर्ज हुआ था, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अरूप मुखर्जी को उनके मोहिषीला कॉलोनी स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया था।
फिलहाल जमानत पर रिहा होने के बाद कांग्रेस खेमे में खुशी का माहौल है, वहीं इस मामले को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासी घमासान और तेज होने की संभावना है।
