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दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बड़ी बैठक के बाद बंगाल की सियासत में हलचल, SIR और CEC के मुद्दे पर विपक्ष एकजुट, NDA ने आरोपों को किया खारिज

कोलकाता/नई दिल्ली।

30 सितंबर 2026 को दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में INDIA ब्लॉक के नेताओं की अहम बैठक हुई। बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट के SIR को लेकर विपक्ष की आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में ममता बनर्जी, अभिषेक बनर्जी के साथ कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी समेत CPI(M) और अन्य विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए।

बैठक का एजेंडा क्या था?

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूची के SIR को लेकर आपत्ति जताई है। बैठक के बाद INDIA ब्लॉक ने 2 से 8 अक्टूबर तक ‘Save Democracy’ अभियान और 6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च का ऐलान किया है।

दूसरी तरफ, चुनाव आयोग ने अपने सभी फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत बताया है। BJP ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR का मकसद डुप्लीकेट और मृत मतदाताओं के नाम हटाकर सूची को साफ करना है।

बंगाल फैक्टर क्यों अहम?

चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 में से BJP को 207 और TMC को 80 सीटें मिलीं। इस परिणाम के बाद ममता बनर्जी की दिल्ली में INDIA ब्लॉक की बैठक में सक्रियता को राजनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

हालांकि, दिल्ली में एक साझा मुद्दे पर एकजुटता और बंगाल में जमीनी स्तर पर राजनीतिक गठबंधन दो अलग-अलग बातें हैं। बंगाल में TMC, कांग्रेस और लेफ्ट लंबे समय से अलग-अलग समीकरणों में रहे हैं।

अब आगे क्या?

फिलहाल तीन चीजें एक साथ चल रही हैं – एक तरफ INDIA ब्लॉक चुनावी प्रक्रिया को लेकर संयुक्त अभियान बना रहा है, दूसरी तरफ NDA चुनाव आयोग का बचाव कर रहा है और तीसरी तरफ बंगाल में 2026 के नतीजों के बाद नया सत्ता-समीकरण बना है। आने वाले महीनों में बंगाल की राजनीति में संगठन और जमीनी मुद्दे ही तय करेंगे कि दिल्ली की एकजुटता का असर राज्य में कितना पड़ता है।


 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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