कोयलांचल के बेटे का मेडिकल कॉलेज तक सफर, नीट-यूजी में कुणाल ने हासिल की ऑल इंडिया रैंक 18,252
कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई का मिला अवसर, डॉक्टर बनकर जरूरतमंदों की सेवा करना चाहते हैं जामुड़िया के कुणाल
जामुड़िया। कोयलांचल की धरती से निकलकर चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने की ओर बढ़ रहे परसिया कोलियरी निवासी कुणाल कुमार ने नीट-यूजी 2026 में सफलता हासिल कर क्षेत्र का गौरव बढ़ाया है। ऑल इंडिया रैंक 18,252 और पश्चिम बंगाल स्टेट रैंक 508 प्राप्त करने वाले कुणाल को कोलकाता के नेशनल मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई का अवसर मिला है। उनकी इस उपलब्धि से परिवार सहित पूरे इलाके में खुशी का माहौल है।
ईसीएल कर्मी संतोष गिरि के पुत्र कुणाल की सफलता के पीछे कई वर्षों की तैयारी, नियमित अभ्यास और परिवार का सहयोग रहा है। उन्होंने वर्ष 2023 में नीट की तैयारी शुरू की थी। वर्ष 2025 से राजस्थान के कोटा में रहकर कोचिंग ली और मेडिकल प्रवेश परीक्षा के लिए अपनी तैयारी को आगे बढ़ाया।
कुणाल की शैक्षणिक यात्रा रानीगंज के मंगलपुर एसकेएस पब्लिक स्कूल से शुरू हुई, जहां से उन्होंने माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण की। इसके बाद कोटा के सेंट्रल पब्लिक स्कूल से उच्च माध्यमिक की पढ़ाई पूरी करते हुए 85 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। स्कूली शिक्षा के साथ उन्होंने मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी पर भी विशेष ध्यान दिया।
कुणाल की सफलता के पीछे परिवार का एक सपना भी जुड़ा है। उनके पिता संतोष गिरि ने बताया कि उनके पिता की इच्छा थी कि परिवार की अगली पीढ़ी से कोई चिकित्सा के क्षेत्र में जाए। इसी आकांक्षा को पूरा करने के लिए परिवार ने कुणाल की पढ़ाई में हरसंभव सहयोग किया। बेटे को मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का अवसर मिलने से परिवार की वर्षों की उम्मीद पूरी होने की दिशा में कदम बढ़ा है।
अपनी सफलता पर कुणाल ने नियमित मेहनत, अनुशासन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और परिवार के सहयोग को महत्वपूर्ण बताया। उनका कहना है कि तैयारी के दौरान लक्ष्य से ध्यान नहीं हटाना और प्रतिदिन पढ़ाई जारी रखना उनकी रणनीति का हिस्सा रहा।
सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं, जरूरतमंदों तक चिकित्सा सेवा पहुंचाना है लक्ष्य
कुणाल का सपना केवल मेडिकल की डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है। वह भविष्य में डॉक्टर बनकर आम लोगों की सेवा करना चाहते हैं। विशेष रूप से ऐसे इलाकों में काम करने की इच्छा रखते हैं, जहां लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं आसानी से उपलब्ध नहीं हो पातीं।
उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने बधाई दी है। कोयलांचल के एक सामान्य परिवार से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक पहुंचने का कुणाल का सफर क्षेत्र के उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बना है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का सपना देखते हैं।














