बंगाल की राजनीति में बड़ा सियासी धमाका, अधीर रंजन ने ममता बनर्जी को दिया कांग्रेस में वापसी का ऑफर, बोले – बंगाल की कमान संभालें दीदी
शिल्पांचल टुडे, कोलकाता।
पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के बीच की तल्खी के बीच कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर ऐसा बयान दिया है जिसने राज्य की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
अधीर रंजन चौधरी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कांग्रेस में वापस लौटने का खुला न्योता दिया है। उन्होंने कहा है कि यदि ममता बनर्जी अपने सांसदों और विधायकों के साथ कांग्रेस में शामिल होकर पार्टी का नेतृत्व संभालती हैं, तो कांग्रेस उनके नेतृत्व में मिलकर भाजपा के खिलाफ राजनीतिक लड़ाई लड़ने को तैयार है।
कांग्रेस में विलय का प्रस्ताव
अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी से अपील की है कि वह तृणमूल कांग्रेस का कांग्रेस में विलय कर दें। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान से भी इस दिशा में पहल करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यदि ममता बनर्जी कांग्रेस में लौटकर बंगाल में नेतृत्व करती हैं, तो पूरी पार्टी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी।
बताया जा रहा है कि अधीर ने अपने बयान में कुछ राजनीतिक शर्तों और मौजूदा नेतृत्व से जुड़े संकेत भी दिए हैं।
1998 का इतिहास फिर चर्चा में
गौरतलब है कि ममता बनर्जी ने वर्ष 1998 में कांग्रेस से अलग होकर तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद तृणमूल ने बंगाल में अपनी अलग पहचान बनाई और 2011 में वाममोर्चा के 34 साल के शासन को खत्म कर सत्ता हासिल की।
अधीर रंजन के इस प्रस्ताव के बाद कांग्रेस-तृणमूल के पुराने रिश्तों और इतिहास पर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है।
क्या बदलेंगे सियासी समीकरण?
इस बयान के बाद कई बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। क्या कांग्रेस और तृणमूल के बीच भविष्य में गठबंधन संभव है? क्या ममता बनर्जी इस प्रस्ताव पर कोई प्रतिक्रिया देंगी? और क्या बंगाल में विपक्षी राजनीति का स्वरूप बदलने वाला है?
वहीं इस पूरे मामले पर तृणमूल सांसद सौगत राय ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व की ओर से औपचारिक प्रस्ताव आने पर ही इस विषय पर चर्चा की जा सकती है और पार्टी के फैसलों में अभिषेक बनर्जी की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
फिलहाल यह अधीर रंजन चौधरी का एक निजी राजनीतिक प्रस्ताव है। यह किसी आधिकारिक गठबंधन, विलय या ममता बनर्जी की कांग्रेस में वापसी का फैसला नहीं है। इसका असर आने वाले दिनों में दोनों दलों की आधिकारिक प्रतिक्रिया से ही साफ हो पाएगा।














