पूजा से पहले उजड़ी नियामतपुर के ‘दिशा’ की रौनक: ग्राहक गायब, लूटपाट से दहशत में यौनकर्मी, सुरक्षा की गुहार
विशेष रिपोर्ट – आकाश सिंह,
शिल्पांचल टुडे कुल्टी।
जहां पूरे बंगाल में दुर्गा पूजा को लेकर बाजारों में चहल-पहल बढ़ गई है, वहीं कुल्टी के नियामतपुर स्थित दिशा रेड लाइट क्षेत्र में इस बार सन्नाटा और डर का माहौल है। पूजा से पहले कमाई बढ़ने की उम्मीद की जगह यहां रहने वाली यौनकर्मी दोहरी मार झेल रही हैं – एक तरफ ग्राहकों की संख्या में भारी गिरावट और दूसरी तरफ लूटपाट व छिनतई की बढ़ती घटनाएं।
क्यों घट रहे हैं ग्राहक?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इलाके में असुरक्षा की भावना बढ़ने से बाहरी लोगों का आना-जाना काफी कम हो गया है। कई ग्राहक लूटपाट के डर से दिशा क्षेत्र में आने से कतरा रहे हैं। इसका सीधा असर यहां की महिलाओं की रोजी-रोटी पर पड़ा है। जिन महिलाओं की पूरी आजीविका इसी पर टिकी है, उनके सामने अब दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा हो गया है।
त्योहार पर बढ़ा खर्च, जेब खाली
एक यौनकर्मी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “पूजा के समय तो हम भी अपने बच्चों के लिए नए कपड़े, घर का किराया और जरूरी सामान जुटाने की सोचते हैं, लेकिन इस बार कमाई इतनी कम है कि घर चलाना भी मुश्किल हो रहा है।”
दुर्गा पूजा जैसे बड़े त्योहार से पहले जब हर किसी पर अतिरिक्त खर्च का बोझ होता है, तब आमदनी में गिरावट का असर सीधे उनके बच्चों की पढ़ाई, भोजन और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है।
सिर्फ कमाई नहीं, सुरक्षा भी बड़ा सवाल
समस्या सिर्फ पैसों की नहीं है। हाल के दिनों में ग्राहकों के भेष में आकर लूटपाट और मोबाइल-नकदी छीनने की शिकायतें भी सामने आई हैं। काम के दौरान अपनी सुरक्षा को लेकर यौनकर्मियों में दहशत है। शिकायत करने पर भी अक्सर उनकी आवाज अनसुनी रह जाती है।
प्रशासन से क्या है मांग?
दिशा क्षेत्र की महिलाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
1. पुलिस गश्त बढ़ाई जाए: इलाके में नियमित और विशेषकर रात में पुलिस गश्त तेज की जाए।
2. त्वरित कार्रवाई: लूटपाट की शिकायतों पर तुरंत FIR और कार्रवाई हो।
3. सम्मान और स्वास्थ्य सेवाएं: उन्हें भी सुरक्षित कार्यस्थल, स्वास्थ्य जांच और सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
यह मामला सिर्फ कानून-व्यवस्था का नहीं, बल्कि मानवता और बराबरी का भी है। त्योहार की रौनक के बीच समाज के इस हाशिए पर खड़े वर्ग की सुरक्षा और सम्मानजनक जीवन की मांग पर ध्यान देना बेहद जरूरी है।














