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मोहन भागवत के बयान पर बंगाल में सियासी पारा हाई, TMC के आरोपों पर RSS समर्थकों का पलटवार

शिल्पांचल टुडे, कोलकाता।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर जुबानी जंग तेज हो गई है।

मामला तब गरमाया जब TMC के एक सांसद ने RSS पर समाज में ध्रुवीकरण और असहिष्णुता बढ़ाने का आरोप लगाया। इस बयान के सामने आते ही सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई और सोशल मीडिया पर भी बहस छिड़ गई।

दोनों पक्षों के अपने तर्क

TMC खेमे का आरोप है कि RSS की विचारधारा समाज में विभाजन पैदा करती है, जबकि RSS समर्थकों का कहना है कि यह आरोप पूरी तरह राजनीतिक है।

समर्थक पक्ष का तर्क है कि संघ पिछले कई दशकों से राष्ट्रसेवा, सेवा कार्य, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरूकता के क्षेत्र में काम कर रहा है। बाढ़, आपदा या सामाजिक सेवा के कार्यों में संघ के स्वयंसेवकों की भूमिका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। किसी संगठन का मूल्यांकन उसके जमीनी कार्यों के आधार पर होना चाहिए।

वहीं मोहन भागवत अपने हालिया सार्वजनिक संबोधनों में लगातार सामाजिक एकता, राष्ट्रीय चरित्र निर्माण और समाज के सभी वर्गों के बीच संवाद बढ़ाने पर जोर देते रहे हैं।

बंगाल की राजनीति में फिर गरमाया मुद्दा

पश्चिम बंगाल में RSS की बढ़ती सक्रियता और उसके सामाजिक कार्यक्रमों को लेकर पहले भी TMC और भाजपा-समर्थक विचारधारा के बीच टकराव देखने को मिलता रहा है। ताजा बयानबाजी ने एक बार फिर विचारधारा बनाम राजनीति की बहस को हवा दे दी है।

फिलहाल यह मुद्दा बंगाल की राजनीतिक चर्चा के केंद्र में बना हुआ है।


 

  

        

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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