Shilpanchal Today

Latest News in Hindi

नवरात्रि का तीसरा दिन: साहस और शांति की देवी माँ चंद्रघंटा की पूजा-विधि, भोग और मंत्र – पंडित हेमंत मिश्रा से जानें

शिल्पांचल, टुडे,आसनसोल।
शारदीय नवरात्रि के तीसरे दिन माँ दुर्गा के तृतीय स्वरूप ‘माँ चंद्रघंटा’ की पूजा की जाती है। इनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र सुशोभित है, इसीलिए इन्हें ‘चंद्रघंटा’ कहा जाता है। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक, कल्याणकारी, और भक्तों को वीरता, साहस व निर्भयता प्रदान करने वाला माना जाता है।

ज्योतिषाचार्य पंडित हेमंत मिश्रा जी ने माँ चंद्रघंटा की पूजा-विधि के बारे में विस्तार से बताया है।

माँ चंद्रघंटा की पूजा-विधान

1. स्नान और स्वच्छता:
प्रातःकाल स्नानादि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। आज के दिन लाल या पीले रंग के वस्त्र पहनना बहुत शुभ माना जाता है।

2. पूजा स्थल की तैयारी:
मंदिर या पूजा स्थल को साफ करें। माता की प्रतिमा या तस्वीर को चौकी पर स्थापित करें। यदि घटस्थापना (कलश) पहले से की हुई है, तो उसकी भी विधिपूर्वक पूजा जारी रखें।

3. सोलह श्रृंगार एवं पूजन सामग्री:
माँ को लाल रंग के पुष्प (विशेषकर कमल या गुलाब), अक्षत (चावल), रोली, कुमकुम और लाल चुनरी अर्पित करें। माँ को श्रृंगार की वस्तुएं भी भेंट की जाती हैं।

4. भोग (प्रसाद):
माँ चंद्रघंटा को दूध या दूध से बनी मिठाइयां (जैसे खीर, रबड़ी, या मखाने की खीर) अत्यंत प्रिय हैं। आज के भोग में केसरयुक्त खीर या दूध से बनी मिठाई का उपयोग करें।

5. मंत्र जाप और ध्यान:
पूजा के दौरान माँ के निमित्त ध्यान और मंत्रों का जाप करें। कम से कम 108 बार उनके बीज मंत्र का जाप अवश्य करें:
– मूल मंत्र: ॐ देवी चन्द्रघण्टायै नमः॥
– प्रार्थना मंत्र: पिण्डजप्रवरारूढ़ा चण्डकोपास्त्रकैर्युता। प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघण्टेति विश्रुता॥

6. आरती:
पूजा के अंत में घी के दीये और कपूर से माँ चंद्रघंटा की आरती करें, क्षमायाचना करें और परिवार की सुख-शांति व आरोग्यता के लिए प्रार्थना करें।

माता की यह कृपा आपके और आपके परिवार के जीवन में साहस, सुख और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करे! जय माता दी।

पंडित हेमंत मिश्रा
ज्योतिषाचार्य (MAJY)
❤️जय बजरंगबली 🙏🏾
Mb 9332449502

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *